तमिलनाडु के नए सीएम बने ई. पलानीस्वामी, जानिए उनकी पूरी कहानी

नई दिल्ली(16 फरवरी):तमिलनाडु के राज्यपाल के सी. विद्यासागर राव ने गुरुवार को शशिकला के वफादार ई. पलानीस्वामी को राज्य का अलगा सीएम बनाया है। राज्यपाल ने पलनिसामी को 15 दन के अंदर बहुमत साबित करने को कहा।

आइए जानते हैं तमिलनाडु के नए सीएम के बारे में...

- पलानीस्वामी का पॉलिटिकल करियर खासा लंबा रहा है। उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता से लेकर सूबे के सीएम तक का सफर तय किया है।

- ई. पलानीस्वामीका जन्म 2 मार्च 1954 को सलेम जिले के आंधियूर में हुआ था। 63 वर्षीय पलानीस्वामी ने 1974 में एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर राजनीतिक जगत में एंट्री की थी।

- किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले पलानीस्वामी को पहली कामयाबी उस वक्त मिली, जब उन्हें सेलम जिले की ईदापद्दी पंचायत यूनिट का पार्टी सेक्रटरी बनाया गया। साइंस ग्रैजुएट पलानीस्वामी को जयललिता के बेहद करीबी लोगों में से एक माना जाता था।

- 1987 में AIADMK के संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन के निधन के बाद पार्टी के दो खेमों में बंटने के बाद वह जयललिता के गुट में शामिल हो गए थे। एक धड़े का नेतृत्व रामचंद्रन की पत्नी जानकी के हाथों में था तो दूसरे गुट की कमान जयललिता के पास थी, जो बाद में 'अम्मा' उपनाम से देश भर में लोकप्रिय हुईं।

- पलानीस्वामी के समर्थक बताते हैं कि रामचंद्रन के निधन से पहले ही 1985 में उन्होंने जयललिता के सम्मान में पार्टी का एक अलग झंडा तैयार किया था और पूरे ईदापद्दी क्षेत्र में जयललिता को 'पुरात्ची थलावी अम्मा' के नाम से लोकप्रियता दिलाई थी। 1990 में जयललिता के नेतृत्व में पार्टी के दोनों खेमों का जब विलय हुआ, तब उन्हें सेलम नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट का जॉइंट सेक्रटरी नियुक्त किया गया था।

- 1989, 1991, 2011 और 2016 के विधानसभा चुनावों में पलानीस्वामी ईदापद्दी सीट से विधानसभा पहुंचे। 1996 में चुनावों में एआईएडीएमके के सफाये के वक्त उन्हें भी ईदापद्दी की अपनी परंपरागत सीट से हार झेलनी पड़ी थी। इसी तरह उन्हें 2001 और 2006 में भी विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। यही नहीं 1999 और 2004 के आम चुनावों में भी उन्हें जीत नहीं मिल सकी थी। हालांकि 1998 में वह तिरुचेंगोडे लोकसभा सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे।

- जमीनी कार्यकर्ता से लेकर सीएम तक का सफर तय करने वाले पलानीस्वामी ने 40 साल के अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एआईएडीएमके में उनका कद उस वक्त अचानक बढ़ गया, जब 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में सेलम जिले की 11 सीटों में से पार्टी ने 10 पर भारी मतों से जीत हासिल की। उनके योगदान को देखते हुए जयललिता ने उन्हें पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंटच समेत हाईवे और माइनर पोर्ट्स जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी थी। 2011 से ही वह हाईवे ऐंड माइनर पोर्ट्स मिनिस्टर थे। पलानीस्वामी को जयललिता कैबिनेट के उन मंत्रियों में से माना जाता था, जो उनके सबसे नजदीकी लोगों में से एक थे।