OMG : बड़े बेआबरू होकर निकले तेरे कूचे से! क्या चीन की माशूकाएं भी FAKE होती हैं?

बीजिंग (3 अगस्त) :  ये इश्क नहीं हैं आसां। आग का दरिया है और डूब के जाना है। ज़माना आधुनिक है। अब आग का दरिया तो नहीं है लेकिन माशूका चीन जैसे देश में रहती हो तो मुश्किलें भी कम नहीं। ऐसी ही कुछ बीती हॉलैंड के एलेक्जेंडर पीटर सिर्क पर।

41 साल के सिर्क जनाब अपनी ऑनलाइन चीनी माशूका को मिलने के इरादे से हॉलैंड से उड़ान भर कर चीन के हुनान प्रांत पहुंच गए। अब उन्हें सिवाए इस बात के और कुछ नहीं पता कि उनकी माशूका का नाम झांग है। ये आशिक साहब पिछले 10 दिन से चांगशा एयरपोर्ट पर अपनी माशूका के इंतज़ार में आंखे बिछाए बैठे हैं। और माशूका इतनी बेमुरव्वत निकली कि इनसे मिलने ही नहीं आ रही।

सिर्क ने चीनी मीडिया को बताया कि उनकी 26 वर्षीय झांग से दो महीने पहले एप के ज़रिए मुलाकात हुई। दोनों का इश्क ऑनलाइन ही परवान चढ़ता रहा। एक दिन सिर्क से रहा नहीं और उसने झांग का दीदार करने के लिए चीन की उड़ान भरने का फैसला किया। लेकिन सिर्क का चांगशा एयरपोर्ट पहुंचने पर उस वक्त दिल टूट गया जब झांग उससे मिलने नहीं पहुंची।  

लेकिन सिर्क भी ठहरे पक्के मजनू मियां। उन्होंने भी ठान रखी है जब तक उनकी लैला मिलने नहीं आएंगे वो एयरपोर्ट नहीं छोड़ेंगे। 10 दिन के इंतज़ार में सूख कर सिर्क की ये हालत हो गई कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।

हुनान टीवी पर सिर्क की आशिकी की दास्तां पर रिपोर्ट प्रसारित हुई तो एक दिन बाद खुद को झांग बताने वाली लड़की ने चैनल से संपर्क किया।

 

झांग ने चैनल को साफ किया कि वो इस सब को मजाक समझ रही थी। जब एयरपोर्ट से सिर्क ने पहली बार उसे फोन किया तो वो दूसरे प्रांत में प्लास्टिक सर्जरी करा रही थी, इसलिए फोन नहीं लिया। बहरहाल, ये मुद्दा दुनिया भर के सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बना हुआ है। कोई सिर्क को मूर्ख बता रहा है। तो कोई ये सवाल कर रहा है कि चीन में क्या सब कुछ नकली है।

अब स्थिति ये है कि इसी हफ्ते सिर्क घर वापसी की उड़ान भरने वाले हैं। बड़े बेआबरू होकर निकले तेरे कूचे से हम।