DRDO के इस दावे से फाइटर एयरक्राफ्ट की टूटी रूस से डील, भारत के 29.5 करोड़ डॉलर डूबे

नई दिल्ली ( 13 जून ): भारत की रूस के साथ मिलकर जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने की डील हुई थी। अब 9 अरब डॉलर की वह डील टूट गई है। डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने दावा किया है कि इस प्रॉजेक्ट के लिए उसके पास जरूरी सभी टेक्नॉलजी मौजूद हैं या वह इसे देश में डेवलप कर रहा है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक डील टूटने की पीछे डीआरडीओ का यह दावा है। डील टूटने से रूस को दी गई 29.5 करोड़ डॉलर की शुरुआती रकम भी डूब गई है।इस डील के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाता, जिनके पास फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट मौजूद हैं। ये एयरक्राफ्ट अमेरिका और चीन के पास हैं। भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस फाइटर एयरक्राफ्ट को खरीदने के फैसले के साथ यह डील रद्द की गई है।इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक डील के लिए बातचीत में शामिल सूत्रों ने बताया कि इस प्रॉजेक्ट को लेकर प्रगति न होने की वजह डीआरडीओ का यह जोर देना था कि उसके पास इसके लिए जरूरी टेक्नॉलजी डिवेलप करने की क्षमता है। रूस ने भारत को फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट मिलकर बनाने की पेशकश की थी। इसके लिए अधिकांश रिसर्च भारत करने के साथ ही टेक्नॉलजी के पूरे ट्रांसफर पर भी सहमति बनी थी।