'नाग' मिसाइल में सुधार की तैयारी में DRDO

नई दिल्ली (23 जून): डिफेंस रीसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने कहा है कि सेना रेंज सुधारों के साथ एंटी-टैंक मिसाइल 'नाग' को खरीद के पहले चरण में शामिल करेगी। सेना पहले से ही काफी समय से लंबित इस मिसाइल सिस्टम को 4 किलोमीटर के टारगेट रेंज तक लाने के लिए काम करेगी। 

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, डीआरडीओ की तरफ से विकसित नाग थर्ड जनरेशन की फायर एंड फॉरगेट गाइडेड मिसाइल है। जो टारगेट्स को डिटेक्ट कर उन्हें मारने में सक्षम है। इसका थर्मल कॉन्ट्रैस्ट काफी कम है।

इस मिसाइल की अधिकतम रेंज 4 किलोमीटर है। जो गर्मियों के तेज तापमान में असफल हो जाती है। डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल एस क्रिस्टोफर ने बताया, "हमने रक्षामंत्री से आग्रह किया है। उन्होंने हमसे सेना से बातचीत करने के लिए कहा है कि पहले चरण के लिए वे इसे कुछ कमतर रेंज के साथ स्वीकार कर सकते हैं। और वह भी दोपहर के वक्त (11AM से 3PM) के लिए। दूसरे चरण के लिए हम टारगेट के लिए इसे सुधारने में काम करेंगे।"

यह मिसाइल इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलेपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) के हिस्से के तौर पर विकसित की जा रही है। जो 1980 के दशक में शुरू हुआ था। नाग आईजीएमडीपी के तहत डीआरडीओ की तरफ से विकसित पांच मिसाइल सिस्टम्स में से आखिरी है।