जानें कौन थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी, उनकी पुण्यतीथि पर BJP क्यों मना रही है बलिदान दिवस ?

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 जून): जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज पुण्यतीथि है। इस मौके पर बीजेपी जम्मू-कश्मीर में बलिदान दिवस मना रही है। बीजेपी ने जम्मू में एक बड़ी रैली का आयोजन किया है जिसे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी संबोधित करेंगे। 6 जुलाई 1901 को श्यामा प्रसाद मुखर्जी का कलकत्ता में जन्म हुआ था। 23 जून 1953 को जम्मू-कश्मीर में उनकी संदेहास्पद हालत में मौत हो गई थी।मुखर्जी ने 1917 में मैट्रिक और 1921 में बीए किया। 1923 में उन्होंने लॉ की उपाधि ली और 1926 में इंग्लैण्ड से बैरिस्टर बनकर स्वदेश लौटे। 33 साल की उम्र में वो कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बन गए थे। लोगों को जागृत करने के मकसद से डॉ. मुखर्जी ने राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबन्धन का निर्माण किया। डॉ. मुखर्जी का मानना था कि हम सब एक हैं। इसलिए धर्म के आधार पर वे देश के विभाजन का उन्होंने विरोधी किया।महात्मा गांधी और सरदार पटेल के अनुरोध पर वो भारत सरकार के पहले मंत्रिमंडल में शामिल हुए। उन्हें उद्योग जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी मिली। संविधान सभा और प्रान्तीय संसद के सदस्य और केन्द्रीय मंत्री के नाते उन्होंने जल्द ही अपनी खास पहचान बना ली। लेकिन राष्ट्रवादी चिन्तन के चलते उनकी अन्य नेताओं से मतभेद लगतार बनी रही। राष्ट्रीय हितों की प्रतिबद्धता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानने के कारण उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।इसके बाद मुखर्जी ने एक नई पार्टी बनाई, जो उस समय वह सबसे बड़ा विरोधी पक्ष था। इस प्रकार अक्टूबर, 1951 में भारतीय जनसंघ का उदय हुआ। डॉ. मुखर्जी हमेशा जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग मानते थे। उस समय जम्मू-कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। डॉ. मुखर्जी ने संसद में अपने भाषण में धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की थी। उन्होंने अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में अपना यही संकल्प व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इसके लिए अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। साथ ही तात्कालिन जवाहरलाल नेहरू की सरकार को चुनौती दी।इसके बाद अपने संकल्प को पूरा करने के लिये मुखर्जी 1953 में बिना किसी अनुमति के जम्मू कश्मीर की ओर निकल पड़े। वहां पहुंचते ही मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया था। ऐसे महान बहुमुखी प्रतिभा के धनी मुखर्जी का 23 जून 1953 को संदेहास्पद हालत में निधन हो गया।