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भारत ने दिये व्यापारिक समझौतों में सुधार के सुझाव, एशियान में लटक गया आरसीईपी !

भारत को चीनी सामानों की बहुतायत मात्रा में आयात की चिंता है। इस वजह से भारत की मांगें पूरी होनी बहुत मुश्किल हैं क्योंकि चीन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। एशियानदेशों को उम्मीद थी कि सोमवार को कम से कम अग्रीमेंट का ऐलान कर दिया जाएगा। थाइलैंड के प्रधानमंत्री ने भी अपने भाषण में कहा था कि ट्रेड वॉर की वजह से वैश्विक विकास दर प्रभावित है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (3 नवंबर): अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर की वजह से साउथईस्ट एशिया के बड़े देश रीजनल कॉम्प्रिहंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) पर जल्द सहमति बनाना चाहते हैं। बैंकॉक में साउथ एशियन नैशन्स (एशियान) के देशों के सम्मेलन में इस के आगे बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन अब इसके फाइनल होने में संदेह नजर आ रहा है। दरअसल भारत ने अपनी कुछ मांगें रखी थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने ओपनिंग स्पीच में भी आरसेप का जिक्र नहीं किया। उन्होंने केवल वर्तमान व्यापार समझौतों में सुधार की बात ही की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'इससे न केवल आर्थिक संबंध सुधरेंगे बल्कि व्यापार में संतुलन भी आएगा।' एक सूत्र ने बताया कि भारत को चीनी सामानों की बहुतायत मात्रा में आयात की चिंता है। इस वजह से भारत की मांगें पूरी होनी बहुत मुश्किल हैं क्योंकि चीन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। एशियानदेशों को उम्मीद थी कि सोमवार को कम से कम अग्रीमेंट का ऐलान कर दिया जाएगा। थाइलैंड के प्रधानमंत्री ने भी अपने भाषण में कहा था कि ट्रेड वॉर की वजह से वैश्विक विकास दर प्रभावित है और आरसेप पर आपस में बातचीत करके सहमति बनाना जरूरी है।

कुछ देशों ने यह भी कहा था कि भारत के बिना भी यह समझौता किया जा सकता है और इसमें जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यू जीलैंड को लेकर आगे बढ़ा जाए। लेकिन थाइलैंड के वाणिज्य मंत्री इस बात पर सहमत नहीं हुए। उन्होंने रविवार को कहा था कि भारत ने इससे बाहर निकलने के बारे में कुछ नहीं कहा है और अच्छी बातचीत चल रही है। साथ ही इसमें भारत के शामिल होने से चीन ज्यादा डॉमिनेट नहीं कर पाएगा।

आरसीईपी एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो कि सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में कई सहूलियत देगा। इसके तहत निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं देना पड़ेगा या तो बहुत कम देना होगा। इसमें आसियान के 10 देशों के साथ अन्य 6 देश हैं। बैंकॉक यात्रा पर जाने से पहले पीएम मोदी ने कहा था कि आरसीईपी की बैठक में बात होगी कि व्यापार, सेवाओं और निवेश में भारत के हितों का ध्यान रखा गया है या नहीं। मोदी ने कहा था कि भारत को यह 'स्पष्ट' है कि पारस्परिक रूप से लाभप्रद आरसेप, जिससे सभी पक्ष यथोचित लाभ प्राप्त करते हैं, वह देश और वार्ता में शामिल अन्य सभी राष्ट्रों के हित में है।

आरसीईपी का विपक्ष ने विरोध करते हुए कहा था कि चीन की मौजूदगी भारत के लिए ठीक नहीं है। उद्योग जगत ने भी इसपर चिंता जताई थी। सोनिया गांधी ने कहा था कि सरकार की नीतियों की वजह से आम लोगों का नुकसान हुआ है और आरसीईपी की वजह से घरेलू उद्योग को नुकसान उठाना पड़ेगा। 

Images Courtesy: Google

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