ट्रंप के कारण नजदीक आई कयामत, घड़ी का समय हुआ कम

नई दिल्ली (27 जनवरी): भले ही यह बात आपको थोड़ी जरूर अजीब लगे, लेकिन जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्‍ट्रपति बने है। तब से अलग-अलग तरीकों से उनका विरोध किया जा रहा है। इस बार बुलेटिन ऑफ द अटॉमिक साइंटिस्ट्स से जुड़े वैज्ञानिकों ने कहा है कि ट्रंप के न्यूक्लियर हथियारों और क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर दिए गए बयानों ने दुनिया को और ज्यादा असुरक्षित बना दिया है। जिसके बाद संसार पर कयामत का खतरा अब पहले से ज्यादा मंडराने लगा है।

बुलेटिन ऑफ द अटॉमिक साइंटिस्ट्स से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपनी प्रतीकात्मक डूम्सडे क्लॉक (कयामत के दिन की घड़ी) में प्रलय के वक्त को 30 सेकंड और पहले खिसका दिया। बता दें कि द बुलेटिन ऑफ द अटॉमिक साइंटिस्ट्स एक नॉन टेक्निकल अकादमिक पत्रिका (academic journal) है, जो न्यूक्लियर और दूसरे नरसंहार के हथियारों, क्लाइमेंट चेंज, नई तकनीक, बीमारियों आदि की वजह से ग्लोबल सिक्यॉरिटी पर पड़ने वाले खतरों का अध्ययन करती है। 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु विध्वंस के बाद से इसे प्रकाशित किया जा रहा है।

यह घड़ी इस बात की प्रतीक है कि मानवता इस ग्रह को खत्म करने के कितने नजदीक है। आखिरी बार इस घड़ी के वक्त में 2015 में फेरबदल की गई थी। तब आधी रात के वक्त यानी रात 12 बजे से समय को तीन मिनट पहले खिसकाया गया। उससे पहले, उसे पांच मिनट पहले किया जा चुका है। अब नया वक्त जो तय किया गया है, वह आधी रात से ढाई मिनट पहले है। यानी प्रतीकात्मक तौर पर कयामत का वक्त 30 सेकंड और नजदीक आ

चुका है।

वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों के एक दल ने बयान जारी करके इस फेरबदल की वजह बताई। इनमें 15 नोबल पुरस्कार विजेता भी शामिल हैं। इस कदम की वजह, 'दुनिया भर में कट्टर राष्ट्रवाद का उदय, राष्ट्रपति ट्रंप की परमाणु हथियारों और क्लाइमेट से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी, अत्याधुनिक तकनीकी विकास की वजह से वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर गहराया संकट और वैज्ञानिक विशेज्ञता के प्रति उदासीनता' है।