स्कूलों की फीस बढ़ाने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने दी हरी झंडी

नई दिल्ली (6 जून): स्कूलों की फीस बढ़ाने के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह फीस न बढ़ाने के अपने फैसले पर फिलहाल अमल न करे। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने पिछले साल 17 अक्टूबर को इसी पे-कमिशन की सिफारिशें लागू करने के लिए इन स्कूलों को फीस बढ़ाने की इजाजत दी थी। लेकिन कुछ कारण बस 13 अप्रैल 2018 को आदेश जारी कर इस मंजूरी को बैक डेट से वापस ले लिया था।यानी अगर किसी ने 17 अक्टूबर 2017 के बाद और 13 अप्रैल 2018 के बीच फीस बढ़ाई है, तो उसे लौटाना होगा।  दरअसल, स्कूलों ने कोर्ट में दलील दी थी कि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में देरी से कई स्कूलों के टीचर नौकरी छोड़ सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा निदेशालय के फैसले को बैक डेट से लागू करना अनुचित है। 31 जुलाई को सुनवाई तक हमारा अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।जानकारी के लिए आपको बता दें कि दिल्ली के तकरीबन 450 प्राइवेट स्कूलों की ऐक्शन कमिटी की ओर से दायर याचिका में दिल्ली सरकार के जिन दो सर्कुलर का जिक्र किया गया है, उनमें से एक इसी साल अप्रैल का है और दूसरा पिछले साल अक्टूबर का। अप्रैल में जारी सर्कुलर में दिल्ली सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूलों से कहा था कि वे सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के नाम पर फीस न बढ़ाएं।शिक्षा निदेशालय का कहना था कि यह देखा गया है कि कई स्कूलों ने फीस बढ़ाने के लिए ऑनलाइन प्रपोजल दिए थे मगर यह पाया गया कि उन्हें सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए फीस बढ़ाने की जरूरत नहीं है। निदेशालय ने कहा है कि ये स्कूल अपने प्रपोजल को वापस ले लें। इसके लिए सरकार ने उन्हें 15 दिनों का वक्त दिया था।यानि कि एक बात तो साफ है कि स्कूलों की फीस बढ़ाने को लेकर कोर्ट की ओर से हरी झंडी मिल जाने से आम लोगों की जेब पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। क्योंकि कोर्ट द्वारा ग्रीन सिंगनल दिए जाने के बाद सभी प्राइवेट स्कूल फीस बढ़ाएंगे। जिससे दिल्ली के अभिवावकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।