सऊदी में बोले ट्रंप, धर्म के नाम पर अब बंद हो आतंकवाद का खेल

नई दिल्ली ( 22 मई ): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सऊदी अरब दौरे के दौरान रविवार को कहा कि अपनी-अपनी जमीन को आतंकवाद से मुक्त रखना सभी देशों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ट्रंप ने विश्व के मुस्लिम नेताओं से कहा कि उनका संदेश 'दोस्ती, उम्मीद और प्यार' का है। उन्होंने साथ में यह भी स्पष्ट किया कि मजहबी कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई में मुस्लिम बहुल देशों को नेतृत्व संभालना चाहिए।

ट्रंप ने कहा, 'यह अलग-अलग धर्मों, पंथ या संस्कृतियों के बीच लड़ाई नहीं है। यह बर्बर अपराधियों से लड़ाई है जो धर्म के नाम पर मानव जीवन और मासूम लोगों को मिटाना चाहते हैं। यह अच्छाई और बुराई के बीच लड़ाई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति मध्य पूर्व में आतंकवाद को खत्म करने के लिए 'देशों के गठबंधन' बनाए जाने की अपील की। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अरब-इस्लामी अमेरिकी शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के देशों को एकजुट होने का आह्वान किया।

ट्रंप ने आगे कहा कि अरब के देश इस 'उन्मादी हिंसा' के सबसे ज्यादा शिकार हुए। उन्होंने उम्मीद जताई कि शिखर सम्मेलन में मुस्लिम देशों के नेताओं का जमावड़ा मध्य पूर्व के साथ-साथ संभवतः पूरे विश्व में शांति का प्रारंभ हो सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ''आतंकवाद से दुनिया भर के देश पीड़ित हैं। कुछ देश आतंकवाद को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। इससे मध्य-पूर्व से लेकर भारत और रूस जैसे देश भी प्रभावित हो रहे हैं। धर्म के नाम पर आतंकवाद का खेल अब बंद होना चाहिए।''

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिनों के सऊदी अरब के दौरे पर हैं। बतौर राष्ट्रपति यह उनका पहला विदेश दौरा है। अरब-इस्लामी अमेरिकी शिखर सम्मलेन में उनका संबोधन आकर्षण का केंद्र था। अरब और मुस्लिम जगत के 50 से ज्यादा नेताओं के बीच उन्होंने अरब क्षेत्र में अमेरिका की नई भूमिका को रेखांकित करने की कोशिश की। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की सभी देशों को मिलकर आतंकवाद का सफाया करना होगा।

डोनाल्ड ट्रंप अपने संबोधन में आतंकवाद के बाद ईरान पर बरसे। उन्होंने हसन रूहानी सरकार को हथियारबंद लड़ाकों को हथियार और प्रशिक्षण देकर क्षेत्र में अस्थिरता के बीज बोने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान पर मध्य पूर्व में अस्थिरता और अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया।सऊदी अरब के शाह सलमान ने भी अपने संबोधन में ट्रंप की बातों का समर्थन किया। शाह ने ईरान को वैश्विक आतंकवाद रूपी 'भाले की नोक' बताते हुए कहा कि सऊदी अरब आतंकवाद के लिए फंडिंग करने वालों पर कोई रियायत नहीं करेगा।शाह सलमान ने कहा, 'बुरी ताकतों और दुनिया में जहां कहीं भी चरमपंथ हो, उनके खिलाफ एकजुट होकर लड़ना हमारी जिम्मेदारी है। यह खुदा के प्रति, हमारे लोगों के प्रति और पूरी दुनिया के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। ईरान वैश्विक आतंकवाद रूपी भाले की नोक की नुमांइदगी करता है।'