ट्रंप ने ताइवान की राष्ट्रपति से की बात, चीन के उड़े होश

नई दिल्ली(3 दिसंबर): चीन के प्रति अमेरिका की दशकों पुरानी राजनयिक नीति को तोड़ते हुए नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग-वेन से बात की। अमेरिका के इस कदम से चीन को परेशानी हो सकती है, क्योंकि चीन का मानना है कि ताइवान विश्वासघात करने वाला प्रांत है।

- 1979 के बाद से यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ताइवान से बात की है। ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के शुरू होने से पहले उनका यह कदम 'लगभग चार दशक से चल रही अमेरिका की राजनयिक गतिविधियों को आश्चर्यजनक रूप से तोड़ने वाला है, जो चीन के अमेरिकी संबंधों में तल्खी बढ़ा सकता है।

- हांग कांग के फिनिक्स टीवी के अनुसार इस बातचीत पर पहला कमेंट चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दिया और कहा, उनका मानना है कि ताइवान के राष्ट्रपति और ट्रंप के बीच हुई बातचीत से चीन के प्रति अमेरिकी नीति प्रभावित नहीं होगी। वांग ने कहा, 'चीन-अमेरिका रिश्तों के स्वस्थ विकास के लिए वन-चाइना नीति एक आधारिशला है और हमें उम्मीद है कि यह राजनीतिक नींव खत्म नहीं होगी।'

-ट्रंप के सत्ता हस्तांतरण दल ने फोन पर हुई बातचीत के बारे में बताया, 'नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन से बात की। ताइवान के राष्ट्रपति ने ट्रंप को बधाई दी। चर्चा के दौरान उन्होंने करीबी अर्थव्यवस्था, राजनीतिक और अमेरिका एवं ताइवान के बीच मौजूद सुरक्षा संबंधों का जिक्र किया।' ताइवान की राष्ट्रपति के साथ हुई ट्रंप की यह बातचीत अपना कार्यकाल संभालने से पहले एशियाई देशों के नेताओं के साथ उनकी फोन पर बातचीत की श्रृंखला का ही हिस्सा है।

- नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने इस साल के शुरू में ताइवान की राष्ट्रपति बनने पर साई को बधाई दी थी। इसके अलावा ट्रंप ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, फिलिपीन्स के राष्ट्रपति रोद्रिगो रोवा दुतेर्ते, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग से भी बात की। सब ने ट्रंप की जीत पर उन्हें बधाई दी।

- ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय से शनिवार को एक बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि ट्रंप और साई ने एशिया को प्रभावित करने वाले मुद्दों व अमेरिका के साथ ताइवान के भविष्य के रिश्तों पर बात की। इसमें कहा गया है कि ताइवान-अमेरिका के साथ द्वपक्षीय रिश्तों को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयासरत है। हालांकि वाशिंगटन के चीनी दूतावास, बीजिंग में विदेश मंत्रालय व ताइवान के विदेश मंत्रालय से इस पर किसी तरह की प्रक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।