भारत और चीन चाहें या नहीं चाहें उन्हें आस-पड़ोस में रहना है: दलाई लामा

नई दिल्ली ( 19 नवंबर ): तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने रविवार को कहा कि भारत व चीन में अपार संभावनाएं हैं और वे 'व्यावहारिक स्तर' पर साथ काम कर सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि भारत और चीन चाहे इसे पसंद करें या नहीं उन्हें ‘आस-पड़ोस’ में रहना है। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देश अधिक करुणामय संसार बनाने के लिए साथ मिलकर काम कर सकते हैं। 

82 वर्षीय बौद्ध भिक्षु ने यह भी कहा कि तिब्बती चीन से स्वतंत्रता या अलगाव की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अधिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं। उन्होंने ‘यूरोपीय संघ की भावना की भी प्रशंसा’ की। 

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु ने ‘भारत संघ’ के विचार की सराहना की। उन्होंने अपनी हालिया मणिपुर यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें अधिक ‘व्यापक और समग्र’ तरीके से सोचने की आवश्यकता है। मणिपुर में उन्हें पता चला कि कुछ नेता राज्य के लिए स्वतंत्रता चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन में दो अरब से अधिक लोग हैं। हालांकि उनके बीच मतभेद है।