...तो इसलिए डोकलाम में पीछे नहीं हटेगा भारत

नई दिल्ली (23 जुलाई): भारत और चीन के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा समय से डोकलाम के मुद्दे पर तनाव और तनातनी बना हुआ है। चीन जहां भारत को इस क्षेत्र से सेना हटाने या भी इसके गंभीर परिणाम भुगने की धमकी दे रहा है वहीं भारत ने भी कड़े शब्दों में ड्रैगन से कह दिया है कि पहले चीन यहां से सेना हटाए फिर वो ऐसा करेगा। लेकिन चीन अभी भी अपनी बातों पर अड़ा है। दरअसल डोकलाम का ये क्षेत्र समारिक लिहाज से चीन ही नहीं भारत के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।

दरअसल चीन सिक्किम के डोकलाम इलाके में सड़क बना रहा है। डोकलाम के पठार में ही चीन, सिक्किम और भूटान के बॉर्डर मिलते हैं। भूटान और चीन इस इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। भारत इस विवाद में भूटान का साथ देता है। भारत में यह इलाका डोकलाम और चीन में डोंगलांग कहलाता है। चीन जहां सड़क बना रहा है, उसी इलाके में 20 किलोमीटर हिस्सा सिक्किम और नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। यह ‘चिकेन नेक’ भी कहलाता है। चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा तो भारत की कनेक्टिविटी पर असर पड़ेगा। भारत के कई इलाके चीन की तोपों की रेंज में आ जाएंगे।

चीन अपनी सड़क को डोकलाम से साउथ में गामोचेन की तरफ बढ़ाना चाहता है। गामोचेन पर भारत की सिक्युरिटी फोर्स तैनात है। गामोचेन से ही जम्फेरी रिज शुरू होता है। यह रिज भूटान के इलाके में है। अगर चीन ने सड़क को बढ़ाया तो वह न सिर्फ भूटान के इलाके में घुस जाएगा, बल्कि वह भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के सामने भी खतरा पैदा कर देगा।

मानसरोवर यात्रा के लिए नाथु ला पास वाला रास्ता डोकलाम भी जाता है। डोकलाम में ही चीन सड़क बना रहा था। दिल्ली से नाथु ला के रास्ते मानसरोवर आने-जाने में 19 दिन लगते हैं। नाथु ला के रास्ते मानसरोवर जाने के लिए सिर्फ ढाई दिन पैदल चलना पड़ता है। बाकी सफर प्लेन और बसों में होता है। इस रास्ते की दूरी 3000 किमी है।

दिल्ली से चलकर उत्तराखंड और लीपूलेख के रास्ते कैलाश-मानसरोवर आने-जाने में 22 दिन लगते हैं। इसमें 12 दिन पैदल चलना पड़ता है। पर दिल्ली से इस रास्ते की दूरी 854 किमी है। चीन ने शुरू में मानसरोवर यात्रा रोके जाने की वजह नहीं बताई, बाद में खुलासा हुआ कि वह डोकलाम को लेकर चल रही तनातनी की वजह से यात्रा रोक रहा है। भारत ने फिलहाल इस रास्ते से यात्रा रद्द कर दी है।