चीन को उम्मीद, बीजिंग दौरे के दौरान डोभाल सुलझा सकते हैं सिक्किम विवाद

नई दिल्ली (23 जुलाई): डोकलाम विवाद को लेकर भारत को लगतार युद्ध की गीदड़ भभकी देने वाले चालबाज चीन के तेबर नरम पड़ते नजर आ रहे हैं। डोकलाम से पहले अपनी सेना नहीं हटाने के भारत के तल्ख तेवर के बाद अब चीन को NSA डोभाल के दौरे से उम्मीद जगी है। चीन का कहना है कि भारत के NSA अजित भोडाल के बीजिंग दौरे के दौरान ये विवाद खत्म हो सकता है।

आपको बता दें कि नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर यानी NSA अजित डोभाल ब्रिक्स देशों के NSA की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए27-28 जुलाई को बीजिंग जाने वाले हैं। चीनी जानकारों का कहना है कि सिक्किम में चीन और भारत के बीच जारी बॉर्डर विवाद के सुलझने का रास्ता इस दौरान निकल सकता है। गौरतलब है कि बिक्स के दौरान चीन के NSA और स्टेट काउंसिलर यांग जिएची एक मीटिंग होस्ट करेंगे। 

चाइना रिफॉर्म फोरम थिंकटैंक के रिसर्च फेलो मा जिआली का कहना है कि डोवाल की विजिट इंडिया-चीन बॉर्डर विवाद को खत्म करने का अहम जरिया हो सकती है और इसे तनाव कम करने के मौके के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जिआली के मुताबिक चीन डोवाल की दौरे के दौरान भारत के सामने सिक्किम विवाद पर अहम बयान दे सकता है। उम्मीद है कि इससे तनाव को कम करने के रास्ते ढूंढे जाए। भारत भी अपनी सेनाएं वापस बुलाने के एवज में चीन से कुछ रिक्वेस्ट कर सकता है। लेकिन, इस बातचीत से भी अगर इस विवाद का कोई हल नहीं निकलता है तो दोनों देशों के बीच रिश्तों पर खराब असर पड़ेगा।

इससे पहले चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने सिक्किम बॉर्डर विवाद पर सुषमा स्वराज के संसद में दिए बयान को झूठा करार दिया था। ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपदकीय में लिखा था कि चीन की सीमा में भारत की घुसपैठ किया है और नई दिल्ली ने अपनी इस हरकत से इंटरनेशनल कम्युनिटी को चौंका दिया है और कोई भी देश भारत के इस आक्रमक रवैये का समर्थन नहीं करता। आपको बदा दे कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को संसद में कहा था कि डोकलाम चीन-भूटान-भारत का ट्राइजंक्शन में भारत की पोजिशन गलत नहीं है और सभी देश उसका सपोर्ट कर रहे हैं।

वहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग का कहना है कि हमारे डिप्लोमैटिक रास्ते खुले हुए हैं। भारत और चीन की बातचीत से ही विवाद हल हो सकता है। हालांकि लू ने ये भी कहा कि बातचीत के लिए बेहतर होगा कि भारतीय सेना को सीमा से पीछे हटना होगा। चीन का दावा है कि भारतीय सेना उसकी टेरेटरी में गलत तरीके से दाखिल हुई है।