डोकलाम: 150 मीटर पीछे हटीं भारत और चीन की सेनाएं

नई दिल्ली(7 सितंबर): डोकलाम में भारत और चीन के जवान अभी भी तैनात हैं हालांकि जवानों के बीच 300 मीटर की दूरी है। तनाव कम करने की प्रक्रिया का पालन करते हुए भारतीय और चीनी सेना के जवान पहले की तुलना में 150 मीटर पीछे चले गए हैं, लेकिन एक दूसरे पर नजर बनाए हुए हैं। 

- उम्‍मीद जताई जा रही है आने वाले दिनों में सैनिक और पीछे हटेंगे। पूरी तरह से जवानों की वापसी में कुछ सप्‍ताह का समय लग सकता है। 

- यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई जब पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्‍स समिट के लिए चीन का दौरा किया। इस दौरे पर चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात भी काफी सकारात्‍मक रही। दोनों की बैठक के दौरान मतभेदों को विवाद ना बनने देने पर सहमति बनी है।

- दोनों देशों के जवान अपने टेंट और सड़क बनाने के उपकरणों के साथ टकराव वाली जगह से 150-150 मीटर पीछे चले गए हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से 28 अगस्‍त को जारी बयान में भी यही बात कही गई।

- एक अंग्रेजी अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि बीजिंग में कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की शर्तें तय की गई। भारतीय दल का प्रतिनिधित्‍व चीन में भारत के राजदूत विजय गोखले ने किया। बातचीत के दौरान सेना मुख्‍यालय भी शामिल था लेकिन आखिरी प्रस्‍ताव नाथू ला में तैनात ब्रिगेडियर को भेजा गया। उन्‍होंने और उनके चीनी समकक्ष ने तनाव कम करने की प्रक्रिया शुरू करने पर काम किया।

- रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जवान अपने टेंट और बुलडोजर्स के साथ सबसे पहले अपनी सीमा की ओर लौटे। वे भूटान की सीमा के 400 मीटर अंदर थे। इसके बाद चीनी सैनिकों ने भी ऐसा ही किया और वे चुंबी घाटी से आगे याटुंग तक लौट गए। दोनों देशों ने एक दूसरे के पीछे हटने का सत्‍यापन भी किया।

- इसमें यह भी बताया गया है कि भारत का अपन जवानों से उपयुक्‍त संवाद हो रहा था और उन्‍हें समयानुसार निर्देश मिल रहे थे। लेकिन चीन के साथ ऐसा नहीं था। खराब मौसम और संवाद की कमी के चलते चीनियों में भ्रम की स्थिति थी। इसके चलते उनके पीछे हटने में देरी हुई जिससे भारतीय जवानों ने सावधानी बरती। हालांकि उन्‍होंने समझौते प्रक्रिया का पालन जारी रखा। बाद में चीनी सेना पीछे हट गई और भारत की ओर से इसका सत्‍यापन भी किया गया।

- बता दें कि डोकलाम में भारत और चीन के बीच 72 दिनों तक तनाव रहा था। चीनी सेना के डोकलाम में सड़क बनाने के प्रयास के बाद भारतीय जवानों ने भी वहां टेंट लगा लिए थे।