डॉक्टरों का कमाल, पेट में लगाया दूसरा दिल

नई दिल्ली(10 दिसंबर): चेन्नै के डॉक्टों  ने कमाल किया है। एक हार्ट सर्जन ने दो कुत्तों के शरीर में एक अतिरिक्त दिल सफलतापूर्वक लगाया है। यह दिल कुत्तों के पेट में लगाए गए हैं। डॉक्टरों का ये कमाल उन मरीजों के लिए खासा लाभदायक है जिनके दिल कमजोर होते हैं। ऐसे मरीजों के शरीर में अब दो दिल लगाए जा सकते हैं। 

- जो मरीज पूरी तरह हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए फिट नहीं होते हैं उनके लिए फ्रंटियर लाइफलाइन टीम ने स्टेट ट्रांसप्लांट अथॉरिटी से इसके लिए इजाजत मांगी है। अपने प्रयोग को अन्य हार्ट सर्जन के सामने पेश करते हुए डॉक्टरों की टीम ने कहा कि वे इस तकनीक का ह्यूमन ट्रायल कर देखना चाहते हैं कि यह कितनी सफल होती है। ट्रांसटैन के मेंबर सेक्रटरी डॉक्टर पी. बालाजी ने बताया कि इस संबंध में सरकार को सुझाव भेजे जाएंगे। 

- फ्रंटियर लाइफलाइन के चीफ डॉक्टर के.एम. चेरियन ने कहा, 'अगर किसी डोनर हार्ट की पम्पिंग कपैसिटी 30 पर्सेंट से कम होगी तो सर्जन उसे निकाल देंगे। इसके विपरीत, हार्ट फेल होने वाले कई मरीज हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं करा सकते क्योंकि इसमें मल्टी-ऑर्गन फेलियर और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।' उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को कमजोर हार्ट को ब्लड पम्प करने के लिए लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस की जरूरत होगी जो एक मेकेनिकल पम्प होता जिसे मरीज की छाती में लगाया जाता है। इस मशीन की कीमत 1 करोड़ रुपये तक पड़ती है। 

- डॉक्टर चेरियन ने कहा, 'मरीजों को ऐसा हार्ट देना जो मामूली रूप से काम कर रहा है उसके बजाय इस तकनीक जिंदगी और पैसा दोनों बचाए जा सकते हैं।' डॉक्टर इसे 'बायो लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस' कहते हैं। इससे पहले, इसी साल कोयंबटूर के डॉक्टरों ने हेट्रोट्रॉपिक हार्ट ट्रांसप्लांट किया था जिसमें उन्होंने मरीज की छाती में एक चोटा अतिरिक्ट हार्ट लगाया था। डॉक्टरों का कहना है कि पेट में हार्ट लगाए जाने से मरीज की छाती को काटकर नहीं खोलना पड़ता जिससे सर्जिकल रिस्क भी कई गुना कम हो जाती है। 

- हेट्रोट्रॉपिक ऐब्डोमिनल हार्ट ट्रांसप्लांट में मरीज का पुराना दिल अपनी जगह लगा रहता है। नया हार्ट केवल पुराने हार्ट को काम करने में मदद करता है। फ्रंटियर लाइफलाइन की हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जन डॉक्टर मधु शंकर ने कहा, 'इस तकनीक की मदद से जबतक मरीज पूरी तरह हार्ट ट्रांसप्लांट के काबिल नहीं हो जाता तब तक मदद मिल सकती है या इसे हार्ट ट्रांसप्लांट की जगह भी प्रयोग में लाया जा सकता है।' 

-जानवरों पर प्रयोग करते हुए डॉक्टरों ने डोनर हार्ट को पेट के हिस्से में फिट किया। डॉक्टर शंकर ने बताया, 'हमने कुत्तों में देखा कि नया हार्ट उनके मूल दिल को काम करने में मदद कर रहा था। इनमें से एक कुत्ते की पहले ही दिन मौत हो गई क्योंकि उसके पास डोनर ब्लड की कमी थी जबकि दूसरा कुत्ता 48 घंटे तक जिंदा रहा और उसने टहलने के अलावा खाना भी खाया।' जानवरों पर किए गए टेस्ट और स्कैन से पता चला कि दूसरा दिल उपयुक्त क्षमता के साथ खून पम्प कर रहा था। दोनों कुत्तों के पोस्टमॉर्टम से पता चला कि उनके दिल की मांसपेशियां काम करने योग्य थी। डॉक्टर शंकर ने बताया, 'इससे ट्रांसप्लांट के सफल होने का पता चलता है।' हॉस्पिटल अब एथिक्स कमिटी से इस तकनीक के क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत चाहता है।