''यूनिवर्सिटी को 'राष्ट्रविरोधी' कहकर बदनाम ना करें'': JNU टीचर्स

नई दिल्ली (14 फरवरी): जेएनयू विवाद पर हो रही राजनीति के बीच जेएनयू के टीचर्स ने लोगों से अपील की है कि वे यूनिवर्सिटी को 'राष्ट्रविरोधी' कहकर बदनाम ना करें। गौरतलब है, जेएनयू कैंपस में संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु की फांसी को लेकर एक कार्यक्रम के बाद से विवाद चालू है। जिसमें छात्र नेता को राष्ट्रद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, फैकल्टी मेंबर्स ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी का आंतरिक तंत्र जैसे 'विकृत' हो चुका है। साथ ही संस्थान की स्वायत्तता 'समर्पण' कर चुकी है। उन्होंने कहा कि "यह गलत है कि यूनिवर्सिटी को राष्ट्रविरोधी कहकर बदनाम किया जा रहा है। जो हमेशा से ही अकेडमिक्स और लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए एक प्रतीक रही है। इसकी छवि को राष्ट्रविरोधियों का अड्डा कहकर क्यों खराब किया जा रहा है।" 

सोशल साइंस के एक प्रोफेसर ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर कहा, "हम यहां सालों से पढ़ाते रहे हैं। हम जानते हैं कि जेएनयू में होने का क्या मतलब है। हम लोगों से अपील करते हैं कि वह वर्तमान विवाद से आगे देखें और जेएनयू के साथ 'राष्ट्रविरोधी' विशेषण ना जोड़ें।" 

टीचर्स भी स्टूडेंट्स यूनियन प्रेसीडेंट कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के समर्थन में आ गए हैं। जो इस वक्त उसी कार्यक्रम के संबंध में 'राष्ट्रद्रोह' के आरोप में पुलिस कस्टडी में है। लिंग्युस्टिक्स डिपार्टमेंट के एक प्रोफेसर ने कहा, अगर कोई छात्र गलती करता है तो वह 'अनुशासनहीनता' का मामला है ना कि 'राष्ट्रद्रोह' का।