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दिवाली पर मां लक्ष्मी की खास कृपा पाने के लिए उल्लू की भी करनी चाहिए पूजा, जानें क्यों ?

आज दिवाली है और दिवाली के मौके पर लोग लक्ष्मी पूजा की तैयारी में जुटे हैं। महालक्ष्मी जी मूलतः शुक्र ग्रह की अधिष्टात्री देवी हैं तथा लक्ष्मी जी की हर सवारी गरुड़, हाथी, सिंह और उल्लू सभी राहू घर को संबोधित करते हैं। मां

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 अक्टूबर): आज दिवाली है और दिवाली के मौके पर लोग लक्ष्मी पूजा की तैयारी में जुटे हैं। महालक्ष्मी जी मूलतः शुक्र ग्रह की अधिष्टात्री देवी हैं तथा लक्ष्मी जी की हर सवारी गरुड़, हाथी, सिंह और उल्लू सभी राहू घर को संबोधित करते हैं। मां लक्ष्मी की सवारी उल्लू है। उल्लू दुनिया का सबसे रहस्यमयी पक्षी माना जाता है। उल्लू को भले लोग मूर्खता से जोड़े, लेकिन हकीकत में उल्लू सबसे बुद्धिमान‍ निशाचारी प्राणी होता है। मान्यताओं के अनुसार उल्लू को भूत और भविष्यम का ज्ञान पहले से ही हो जाता है। विश्वभर की कई संस्कृतियों में उल्लू पक्षी को भले ही अशुभ माना जाता हो, मगर ये संपन्नता का प्रतीक भी है। यूनानी मान्यता में इसका संबंध कला और कौशल की देवी एथेना से माना गया है तो जापान में इसे देवताओं के संदेशवाहक के रूप में मान्यता मिली है। भारत में हिंदू मान्यता के अनुसार यह धन की देवी लक्ष्मी का वाहन है।

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उल्लू को लक्ष्मी जी का वाहन क्यों माना जाता है। इसको लेकर एक विचित्र कथा है। जब प्राणी जगत की उत्पत्ति करने के बाद, देवी-देवता धरती पर विचरण के लिए आए, तब सभी पशु और पक्षी, देवी-देवताओं से आग्रह करने लगे, कि वो उन्हें अपना वाहन बनाएं। देवी-देवताओं ने पशु-पक्षियों की बात मानकर उन्हें अपने वाहन के रूप में चुनना आरंभ कर दिया, लेकिन जब लक्ष्मीजी की बारी आई तब वो असमंजस में पड़ गई किस पशु-पक्षी को अपना वाहन चुनें। इस बीच पशु-पक्षियों में भी होड़ लग गई की वो लक्ष्मीजी का वाहन बनेंगे और उनमें आपस में लड़ाई होना शुरु हो गई। इस पर लक्ष्मीजी ने उन्हें चुप कराया और कहा कि प्रत्येक वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन मैं पृथ्वी पर विचरण करने आती हूं। उस दिन मैं आपमें से किसी एक को अपना वाहन बनाऊंगी। कार्तिक अमावस्या के रोज सभी पशु-पक्षी आंखें बिछाए लक्ष्मीजी की राह देखने लगे, लेकिन लक्ष्मी जी आधी रात को पृथ्वी पर पधारी। उस वक्त उल्लू जग रहा था, उसने अपनी तेज नजरों से लक्ष्मी जी को देख लिया और बड़ी तेजी उनके पास पहुंच गया। उल्लू लक्ष्मी जी की प्रार्थना करने लगा कि वो उसे ही अपना वाहन चुन लें। लक्ष्मीजी ने चारों ओर देखा उन्हें कोई भी पशु या पक्षी नजर नहीं आया तो उन्होंने उल्लू को अपना वाहन स्वीकार कर लिया। तभी से लक्ष्मी जी को उलूक वाहिनी कहा जाने लगा।

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उल्लू, जिसके बारे में मान्यता है कि उल्लू की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। घर में ख़ुशियां आती हैं। लेकिन समाज में फ़ैले अंधविश्वास के नाम पर इस अनोखे परिंदे की बलि दे दी जाती है। ज़्यादा संपन्न होने के चक्कर में लोग दुर्लभ प्रजाति के उल्लुओं की बलि चढ़ाने में जुट गए हैं। ये बलि सिर्फ दीपावली की रात को ही पूजा अर्चना के दौरान दी जाती है। तांत्रिकों की मानें तो उल्लू का हर अंग दीपावली पर उपयोगी है। इसके पंख, आंख, चोंच, पंजा, नाखून,खून,हड्डियां और मांस किसी न किसी बड़ी सिद्धि या तांत्रिक क्रिया के काम आता है। कहा जाता है कि तांत्रिक इसे दीपावली के दिन मंत्रों से बांध कर स्थिर कर देते हैं जिसके बाद यह इंसान की भाषा में हर सवाल का जवाब देता है। ये खुद ही बताता है कि उसका कौन सा अंग किस सिद्धि के काम आता है। तांत्रिक क्रियाओं में इस्तेमाल होने की वजह से उल्लू की जमकर तस्करी होती है।

ज्यादा जानकारी के लिए देखिए न्यूज 24 की ये रिपोर्ट...


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