गोरखपुर: आखिर जांच रिपोर्ट में माना गया, मौतें आक्सीजन सप्लाई रुकने से हुईं

नई दिल्ली ( 17 अगस्त ): उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी और इंसेफलाइटिस के चलते बच्चों की मौत के मामले में डीएम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जिलाधिकारी आर. रौतेला ने अपनी रिपोर्ट में इस दुखद हादसे के लिए ऑक्सीजन सप्लाइ करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स को जिम्मेदार ठहराया है। यही नहीं बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के निलंबित प्रिंसिपल आरके. मिश्रा और एनिस्थिसिया डिपार्टमेंट के डॉक्टर सतीश के लापरवाह रवैये को भी त्रासदी की वजह बताया है।

गोरखपुर के डीएम ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन को जो रिपोर्ट सौंपी थी उसमें ऑक्सीजन की कमी और लापरवाही दोनों बातें कही गई हैं। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौतें हुई हैं डीएम की रिपोर्ट इस बात पर मुहर लगा रही है। 

डीएम के इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑक्सीजन सप्लायर ग्रुप फॉर्म पुष्पा सेल प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ द्वारा लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित की गई। जिसके लिए वह जिम्मेदार है जो जीवन रक्षक कार्य को देखते हुए नहीं किया जाना था। 

यानी रिपोर्ट में लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके अलावा डॉक्टर कफील खान का जिक्र भी इस रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट में डॉक्टर सतीश एचओडी  एनेस्थिसिया 11 अगस्त से बिना लिखित अनुमति के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से अनुपस्थित हैं। 

डॉक्टर सतीश लिक्विड ऑक्सीजन आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए भी प्रभारी हैं। डॉक्टर सतीश को अपने दायित्वों का सम्यक निर्वहन न करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। 

इस रिपोर्ट में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को भी दोषी बताया गया है। राजीव मिश्रा को भुगतान न करने का भी दोषी माना गया है। 

यह मजिस्ट्रेट की बोर्ड जांच रिपोर्ट है जो CM के आदेश के बाद मजिस्ट्रेट से जांच कराने की बात कही गई थी। उसी रिपोर्ट को डीएम ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन को सौंपा था।