INSIDE STORY: सपा में 'महाभारत', जानिए क्यों छिड़ी है चाचा-भतीजे में आर-पार की लड़ाई...

डॉ. संदीप कोहली,​ 

नई दिल्ली (14 सितंबर): समाजवादी पार्टी में जारी चाचा-भतीजे की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। आज स्थिती यहां तक पहुंच गई कि परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दोनों चाचा-भतीजा को दिल्ली तलब करना पड़ा है। चाचा शिवपाल तो दिल्ली पहुंच गए लेकिन भतीजे अखिलेश यादव अभी तक लखनऊ से नहीं निकले हैं। जाहिर है पिछले कुछ महीनों से मुलायम परिवार में अनबन की खबर मीडिया की सुर्खियों में रही है। बीजेपी जहां इसे महज दिखावा करार दे रहा है। वहीं उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि सपा की साइकिल तो पहले ही पंक्चर हो चुकी थी, कल अखिलेश ने साइकिल का एक पहिया भी निकाल कर फेंक दिया। जानकार मानते हैं कि फैमिली की इस पॉवर गेम पॉलिटिक्स से आने वाले यूपी वि‍धानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।

आपको बता दें कि मंगलवार रात सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में पार्टी की कमान बेटे और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लेकर अपने छोटे भाई शिवपाल यादव को सौंप दी । कहा गया जैसे ही इसका पता अखिलेश यादव को लगा उन्होंने चाचा शिवपाल से तीनों अहम मंत्रालय राजस्व, सिंचाई और पीडब्ल्यूडी छीन लिए। इससे पहले अखिलेश ने शि‍वपाल के करीबी दो मंत्रियों गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह को कैबिनेट से बाहर करने के बाद मंगलवार को चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल की भी छुट्टी कर दी थी। भतीजे के इस कदम से शिवपाल इस कदर आहत हुए कि उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर दी। 

जानिए कब-कब और किन-किन मुद्दों पर चाचा-भतीजे के बीच हुई तकरार...

झगड़े की शुरूआत हुई था 2012 में... - वैसे चाचा-भतीजे के बीच जंग की शुरूआत नई नहीं है, शुरूआत तो 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही हो गई थी। - जब अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी के बड़े माफिया डीपी यादव को सपा में शामिल करने का खुले तौर पर विरोध किया था।  - अखिलेश के विरोध की वजह से डीपी यादव की सपा में एंट्री नहीं हो सकी थी, चाचा शिवपाल चाहते थे कि डीपी यादव की पार्टी में एंट्री हो।

नवंबर 2015 में पंचायत अध्यक्ष चुनावों को लेकर हुए आमने-सामने... - पिछले साल नवंबर में जब पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में पार्टी के अंदर टिकट बंटवारे को लेकर भी दोनों आमने-सामने आ गए थे। - तब शिवपाल यादव ने टिकट बंटवारे को लेकर अखिलेश के करीबी सुनील यादव और आनंद भदौरिया को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।  - इसके विरोध में अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव का बहिष्कार कर दिया, मजबूरन दोनों युवा नेताओं को पार्टी में फिर से वापस लेना पड़ा था।

बेनी प्रसाद वर्मा और अमर सिंह को लेकर भी हुआ झगड़ा... - इसके बाद मई में बेनी प्रसाद वर्मा को पार्टी में शामिल करने पर अखिलेश असहमत थे, इसमें भी शिवपाल की मुख्य भूमिका थी। - अमर सिंह को भी पार्टी में दोबारा वापस लाने को लेकर आजम और रामगोपाल के खुला विरोध कर रहे थे। - इसके चलते अखिलेश असमंजस में थे, लेकिन शिवपाल पूरी तरह से अमर सिंह के साथ खड़े थे।

अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की पार्टियों के विलय को लेकर आमने-सामने... - अतीक अहमद के पार्टी में शामिल होने पर अखिलेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी, शिवपाल ने अतीक का साथ दिया था।  - शिवपाल यादव को एक और बड़ा झटका तब लगा जब उनकी पहल पर मुख्तार अंसारी की पार्टी का विलय सपा में होने से रोक दिया गया। - 21 जून को कौमी एकता दल का सपा में विलय हो गया लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विरोध के कारण 25 जून को ही विलय रद्द कर दिया गया। - कौमी एकता दल के विलय को लेकर और मुख्तार अंसारी की एंट्री से अखिलेश नाराज थे, विलय कराने के लिए शिवपाल पूरी कोशिश कर रहे थे।  - मध्यस्थता करने वाले मंत्री से नाराजगी जाहिर करते हुये अखिलेश ने मंत्रि‍मंडल से बलराम यादव को निष्कासित किया था।  - विलय रद्द होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार में शिवपाल के कहने पर दोबारा बलराम यादव को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

शिवपाल ने सार्वजनिक मंचों से दी इस्तीफे की धमकी... - इसके कुछ दिन बाद नाराज शिवपाल ने सार्वजनिक मंचों से एक से ज्यादा बार इस्तीफे देने की धमकी दी थी।  - शिवपाल यादव ने 14 अगस्त को मैनपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान बेहद भावुक अंदाज में कहा कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।

मुलायम ने बेटे की जगह भाई का दिया साथ... - इसके बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह को बीच में आना पड़ा था, उन्होंने सार्वजनिक रूप से अखिलेश को फटकार लगाई। - मुलायम ने कहा था कि शिवपाल पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं और उन्होंने बमुश्किल उन्हें मनाया था।  - उन्होंने कहा था कि अगर शिवपाल पार्टी से चले गए तो सरकार और पार्टी के लिए मुश्किल हो जाएगी। 

मुख्य सचिव को लेकर दोनों में टकराव... - अखिलेश के चहेते मुख्य सचिव आलोक रंजन के रिटायरमेंट के बाद दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनाए जाने में शिवपाल का हाथ था। - दीपक सिंघल पिछले चार सालों से शिवपाल के सिंचाई विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत थे। - अखिलेश इसके पक्ष में नहीं थे, वो सिंघल की जगह प्रवीर कुमार को मुख्य सचिव बनाना चाहते थे।

शिवपाल के करीबी मंत्रियों को अखिलेश ने किया बर्खास्त... - 12 सितम्बर को अखिलेश ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अपने दो कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। - दोनों कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह शिवपाल के करीबी माने जाते हैं।

शिवपाल ने मुलायम को फोन कर कहा, अखिलेश के साथ काम करना मुश्किल... - मंगलवार सुबह अखिलेश ने शिवपाल के करीबी और सरकार के चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल को भी बिना कोई कारण बताए अचानक पद से हटा दिया था। - इससे पहले सोमवार को जब दो मंत्रियों को करप्शन के आरोपों को लेकर बर्खास्त किया गया तो इसमें भी शिवपाल से सलाह नहीं ली गई। - बताया जाता है कि इन घटनाक्रमों से नाराज शिवपाल ने इस बारे में मुलायम से फोन पर बात कर अपनी नाराजगी जाहिर की।  - शिवपाल ने मुलायम से कहा कि इस तरह अब अखिलेश के साथ काम करना मुश्किल है। - मुलायम ने बेटे अखिलेश की जगह अपने भाई शिवपाल को सपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। - अखिलेश ने महज दो घंटे के अंदर मंत्रिमंडल में शिवपाल के पर कतरते हुए अहम विभाग छीन लिए।  - शिवपाल के पास राजस्व, सिंचाई और पीडब्ल्यूडी जैसे अहम विभाग थे।

शिवपाल यादव- जो नेताजी कहेंगे वो करूंगा...

- सैफई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिवपाल ने इस्तीफे की अटकलों पर कहा कि नेताजी से मिलने के बाद ही वे फैसला करेंगे। - दो मंत्रियों और चीफ सेक्रेटरी को हटाए जाने के बारे में सवाल पर शिवपाल ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का अधिकार है। - मंत्री पद से इस्तीफा देंगे के सवाल पर शिवपाल ने कहा कि नेताजी से बात करने के बाद निर्णय लेंगे।  - पत्नी, बेटे के पार्टी से इस्तीफा देने पर भी कहा, नेताजी से बात करने के बाद ही इस पर कुछ बोलूंगा।  - अगला चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा, इर पर उल्टा पत्रकार पर ही भड़क पड़े। - चाचा-भतीजे के रिश्तों के सवाल पर बोले सब ठीक है। जो उनका अधिकार हैं, वे कर रहे हैं। जो मेरा अधिकार है, मैं कर रहा हूं। - इससे पहले देर रात सैफई में शिवपाल से मिलने उनके बेटे अंकुर और पत्नी सरला लखनऊ से पहुंचे थे। - कहा गया इन लोगों से मुलायम ने ही कहा था कि वे शिवपाल से मिलने जाएं और उन्हें मनाएं।

अखिलेश यादव- कुछ फैसले नेताजी से पूछकर किए कुछ मर्जी से...

- पत्रकारों को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा, ये झगड़ा परिवार का नहीं, सरकार का है। - अखिलेश ने कहा, मैंने कुछ फैसले तो कुछ नेताजी से पूछकर किए लेकिन कुछ अपने आप भी लिए। - मुख्य सचिव को हटाने को लेकर कहा, ये पीडब्लूडी मंत्री को पता है कि चीफ सेक्रेटरी को किसने हटाया है। - अगर कोई बाहरी व्यक्ति हस्तक्षेप करेगा वो कैसे चल सकता है।  - अखिलेश ने कहा,मैं मानता हूं कि परिवार की बात है। परिवार में सब नेताजी की बात मानते हैं।