बांग्लादेश में युद्ध अपराधी को फांसीः पाकिस्तान के दखल से दोनों के संबंधों में तनाव

नई दिल्ली (13 मई): बांग्लादेश के युद्ध अपराधी और कट्टरपंथी मोतीउर्रहमान निजामी को फांसी दिये जाने पर पाकिस्तनी दखल  से बंग्लादेश और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों में काफी तनातनी बढ़ चुकी है। पाकिस्तान ने बांग्लादेश के राजदूत को बुलाकर विरोध जताया तो बांग्लादेश ने भी पाकिस्तान के राजदूत को बुलाकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि वो बांग्लादेश के भीतरी मामलों में दखल अंदाजी देना बंद करे। बांग्लादेश ने कहा कि पाकिस्तान याद रखे कि बांग्लादेश स्वतंत्र राष्ट्र है पाकिस्तान की उपनिवेश नहीं है। निजामी बांग्लादेश का नागरिक था और उसको बांग्लादेश के कानून के अनुसार सजा दी गयी है।

पाकिस्तान सककार ने कहा है कि बांग्लादेश को 1974 में त्रिपक्षीय समझौते के तहत युद्ध अपराधियों को क्षमादान देना चाहिए। बांग्लादेश की सरकार ने कहा है कि सजा-ए-मौैत के ऐलान के बाद निजामी को क्षमादान का मौका दिया था, लेकिन उसने सरकार से अपने जुर्मों के लिए न तो मांगी और रहम की अपील की। वो अपने रुख पर अड़ा रहा। उसका रवैया बांग्लादेश के कानूनों और सभी संधियों के खिलाफ था। यह भी कहा कि पाकिस्तान किसी भी तरह से बांग्लादेश को अस्थिर करने के प्रयास न करे।