''सबूत है तो फिर डॉक्टर नाईक को गिरफ्तार करे सरकार''

अमित कुमार, नई दिल्ली (7 जुलाई): आतंकी चेलों के गुरु जाकिर नाईक पर सुरक्षा एंजेंसियों की पैनी नजर है। लेकिन इस बीच दिग्विजय सिंह का वो बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कभी जाकिर नाईक को शांतिदूत कहा था। जाकिर नाईक की तारीफ करके  दिग्विजय सिंह फंसे तो उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अगर सबूत है तो फिर डॉक्टर नाईक को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। आईएसआईएस के गिरफ्तार आतंकियों के खुलासे के बाद सरकार चौकन्नी हैं। वहीं, इस्लामिक धर्मगुरू जाकिर नाईक की तारीफ करके दिग्विजय सिंह बुरे फंस गए हैं। दिग्विजय सिंह ने कभी आतंकी चेलों के इस गुरु को शांतिदूत कहा था और इनकी शान में कसीदे पढ़े थे। दिग्विजय सिंह का ये बयान साल 2012 का है जब दिग्विजय सिंह मुंबई में जाकिर नाईक के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मसले पर सफाई दी है और कहा है कि अगर जाकिर नाईक के खिलाफ सरकार के पास सबूत हैं तो उनपर एक्शन क्यों नहीं लिया जाता।

डॉक्टर जाकिर नाईक को लेकर सरकार भी कटघरे में है। वो इसलिए क्योंकि जाकिर नाईक के पीस टीवी को हिंदुस्तान में लाइसेंस नहीं है। बावजूद इसके चोरी छिपे इनके भड़काऊ भाषणों को लोग सुनते थे और इन्हीं भाषणों को सुनकर कई युवा चाहे वो हैदराबाद से गिरफ्तार IS का आतंकी इब्राहीम याजदानी हो या फिर मुंबई लोकल धमाकों का मास्टरमाइंट राहिल शेख आतंक की राह पर आगे बढ़ गए।

साल 2006 में हुए मुंबई लोकल धमाकों के बाद एटीएस ने डॉक्टर जाकिर नाईक से पूछताछ की थी। सवाल ये है कि आखिर उस वक्त से ही सरकार ने इनके भड़काऊ भाषणों पर क्यों नजर नहीं रखी और आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड के साथ नाम जुड़ने के आरोपों के बाद भी दिग्विजय सिंह को जाकिर नाईक शांतिदूत क्यों लगा?

वीडियो:

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