जानिए, यूपी की रणनीति के बीच क्या हैं कांग्रेस में 'सर्जरी' के मायने

संजीव त्रिवेदी, मानस श्रीवास्तव, नई दिल्ली (1 जून): लगातार हार का मुंह देख रही कांग्रेस अब बदलने वाली है- वो भी सर्जरी से। कांग्रेस की राजनीति को पिछले कुछ दिनों से एक पहेली ने उलझा रखा है। क्या राहुल गांधी जल्द ही कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने वाले हैं या फिर सोनिया गांधी ही अध्यक्ष पद पर बनी रहेंगी? गांधी परिवार के करीबी कांग्रेसी नेता भी इस सवाल पर बंट गए हैं। सूत्रों से न्यूज़ 24 को मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल सोनिया गांधी अध्यक्ष पद पर बनी रहेंगी, लेकिन पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी है। 

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश की है। राहुल गांधी के सामने भी यही सवाल खड़ा है। यूपी में पार्टी के पास न कोई भरोसेमंद चेहरा है, न ही जातीय समीकरण। प्रियंका गांधी को कांग्रेस का चेहरा बनाने की मांग उठती रहती है। लेकिन, गांधी परिवार ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। 

9 मई को आए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस को फिर से सूखाग्रस्त कर दिया। हालत ये है कि कभी देश के ज्यादातर राज्यों में सत्ता की कुर्सी अपने हाथ में रखने वाली सवा सौ साल पुरानी पार्टी के पास सिर्फ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम, मणिपुर और मेघालय जैसे छोटे राज्य ही बचे हैं। 

2014 लोकसभा चुनाव में हाल के बाद भी संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव की बात उठी थी। लेकिन, कुछ खास नहीं हुआ। लेकिन, अब संगठन में बड़े बदलाव पर बहस चल रही है। जिसे सबसे तेज आवाज दी- दिग्विजय सिंह ने। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "बहुत हुआ आत्ममंथन और अब जरूरत मेजर सर्जरी की है।" PTC पार्टी में अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी के कयास दिग्विजय सिंह की इसी ट्वीट से शुरु हुई क्योंकि दिग्विजय राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। हालांकि दिग्विजय ने ये कहकर स्थिति को संभालने की कोशिश की कि सर्जरी में सर्जन तो सोनिया और राहुल ही होंगे। लेकिन कांग्रेस संगठन से होते होते आमजनता में ये बात फैल गई कि कांग्रेस में इसबार जबरदस्त बदलाव की तैयारी है और बदलाव इसबार तो अध्यक्ष पद से ही शुरु होगा।

राहुल गांधी के प्रमोशन के पैरोकारों ने फ्रंट पर आकर पोजीशन लेना शुरू कर दिया। इस जमात में सिर्फ युवा कांग्रेसी ही नहीं हैं। पंजाब में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद तो हैं 74 साल के, न्होंने कह दिया कि 70 की हो चुकी सोनिया अब नई पीढ़ी को आगे लाती तो बेहतर होगा। कैप्टन ने News24 से ये भी कहा कि राहुल को जल्द अध्यक्ष बनाने की बात सोनिया ने उनसे खुद कहा था।

लेकिन, कैप्टन की बातें कांग्रेस की पूरी टीम मानने को तैयार नहीं है। गांधी परिवार को करीबी कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि इसके लिए सोनिया गांधी को अध्यक्ष पद छोड़ने की जरुरत नहीं है। कांग्रेस का कोर ग्रुप कहे जाने वाले नेताओं में जिनका नाम आता हैं उनमें गुलाम नही आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल, ए के एंटनी और आनंद शर्मा शामिल हैं। ये ग्रुप पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए सोनिया गांधी की अध्यक्ष पद पर मौजूदगी को सबसे अहम मानता है।  

कांग्रेस के कोर ग्रुप का कहना है कि लड़ाई सिर्फ बीजेपी से नहीं बल्कि RSS से है ।और इस लड़ाई में सोनिया गांधी के राजनीतिक कद की वजह से कांग्रेस को ज्यादा लाभ होगा। इस ग्रुप को लगता है कि सोनिया के रूप में कांग्रेस के पास जो रणनीतिक ताकत है। उसे पार्टी अपनी सबसे मुश्किल लड़ाई में अलग नहीं कर सकती। अगर, अभी अध्यक्ष पद पर बदलाव हुआ तो सारा सिस्टम अस्त-व्यस्त हो जाएगा और कांग्रेस हार की ऐसी कीमत चुकाने के लिए तैयार नहीं है। 

कांग्रेस में इस बात पर एकराय है कि संगठन में बड़े बदलाव की जरुरत है। कुछ दिनों बाद ही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होनी है। जिसके बाद कांग्रेस कार्य समिति से लेकर महासचिवों और सचिवों को राहुल गांधी की पसंद के हिसाब से बदला जाना करीब-करीब तय है। सालों से एक ही कुर्सी पर जमे लोग भी बदलाव की कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं। लेकिन, शर्त यही है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ही बनी रहें।

कांग्रेस का यूपी प्लान

यूपी में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। कांग्रेस ने अब तक तय नहीं किया है कि यूपी की सियासी वैतरणी किस फॉर्मूले से पार होगी। कांग्रेस संगठन में मेजर सर्जरी की तैयारी हो चुकी है। ऐसे में पार्टी का पूरा फोकस यूपी पर होगा। पार्टी को तय करना है कि सूबे में कांग्रेस का चेहरा कौन होगा। प्रियंका गांधी को यूपी में पार्टी का चेहरा बनाने की कई बार मांग हो चुकी है। लेकिन, गांधी परिवार ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सवाल उठता है कि यूपी में राहुल खुद कमान संभालेगें या प्रियंका राजनीति में खुले तौर पर आएंगी । 

कांग्रेस में सबको पता है कि प्रियंका उनके लिए एक ऐसा तुरूप का इक्का है जिस पर बड़ा दांव तो लगाया ही जा सकता है। बीजेपी को भी लगता है कि शायद कांग्रेस प्रियंका को आगे कर सकती है। इसलिए, प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर बीजेपी का प्रहार तेज हो गया है। कांग्रेसी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी यूपी में फ्री हैंड चाहते हैं। मतलब, प्रदेश अध्यक्ष चुनने से लेकर उम्मीदवारों के चुनाव तक में फ्री हैंड। सूत्रों के मुताबिक, कई बार राज्यों में राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष के लिए जिसके नाम का सुझाव दिया, उन्हें नियुक्त नहीं किया गया।

कांग्रेस के सामने यूपी में बड़ी चुनौती ये है कि चुनाव में पार्टी गठबंधन किससे करे और कैसे? क्योंकि, हाल में आए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से शायद ही कोई पार्टी कांग्रेस से हाथ बढ़ाने के लिए आसानी से बढ़े। 

यूपी में पार्टी को मजबूत करने का काम फिलहाल कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को सौंपा है। पार्टी के रणनीतिकार अच्छी तरह जानते हैं कि सूबे का जातीय समीकरण भी अब कांग्रेस के पक्ष में नहीं है। दलित बीएसपी  साथ हैं तो पिछड़े और मुस्लिम समाजवादी पार्टी के साथ तो सवर्ण बीजेपी का साथ निभाएंगे। मतलब, यूपी में कांग्रेस की राह बहुत मुश्किल है। जिसका इलाज मेजर सर्जरी से होना मुश्किल है।