Blog single photo

कांग्रेस में मतभेद जारी, सीएम गहलोत के फैसले से नाराज हुए पायलट

इन दिनों राजस्थान की सत्तारूढ़ कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ताजा मामला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक फैसले से जुड़ा है, जिसका विरोध करते हुए गहलोत

Image Source Google

केजे श्रीवत्सन, न्यूज 24 ब्यूरो, जयपुर(18 अक्टूबर): इन दिनों राजस्थान की सत्तारूढ़ कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ताजा मामला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक फैसले से जुड़ा है, जिसका विरोध करते हुए गहलोत सरकार में उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलेट ने ही करके अपनी नाराजगी जता दी है। दरअसल सचिन पायलेट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस फैसले से नाराज है, जिसमे नगर निकाय चुनावों में सरकार ने पार्षदों के अधिकारों को की तरजीह देने की बजाय पैराशूट यानी चुनाव नहीं लड़ने वाले पैराशूट नेताओं को मेयर और सभापति बनाने का हाई ब्रिड फार्मूला लागू किया है। पायलेट की माने तो न तो इतने बड़े फैसले से सरकार ने मंत्रिमंडल की सलाह ली थी और ना ही PCC अध्यक्ष होने के नाते उन्हें सूचित किया है।

सचिन पायलट ने कहा है  मैंने भी इस फेसले को अखबार में ही पड़ा है। सीधे चुनाव नहीं कराने की बात तक तो ठीक थी, लेकिन हाईब्रिड मोडल अपनाना गलत है। चुनाव सीधे होने चाहिए थे, जो पार्षद का चुनाव नहीं लड़ पा रहा है उसे मेयर बनाने का मौका देने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा। यही नहीं इस तरह का फैसला लेने से पहले ना तो इसकी मंत्रिमंडल में कोई चर्चा नहीं हुई है और ना ही केबिनेट को इसकी जानकारी दी गयी ना ही विधायक दल में इसे रखकर राय पूछी गयी। मेरा मानना है की जब भी चुनाव हो तो उसका एक सन्देश होना चाहिए की जनता अपने प्रतिनिधि को चुन रही  है इसे में यह फैसला व्यवहारिक नहीं है और राजनितिक दृष्टीकोण से भी सही नहीं है। हिन्दुस्तान के किसी भी राज्य में इस तरह की प्रणाली का उपयोग किया गया है। ऐसे मैं मुझे लगता है की इस पर पुनर्विचार करना जरुरी है।  

उधर एक दिन पहले ही सचिन पायलट खेमे के दो मंत्री रमेश चंद मीना और प्रताप सिंह खाचरियावास मुख्यमंत्री गहलोत के हाईब्रिड फार्मूले को पार्षदों के अधिकार के साथ अन्याय बता चुके हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उनकी ही सरकार के मंत्रियों द्वारा इसका विरोध किये जाने को लेकर सवाल किया गया तो सारा ठीकरा मीडिया पर ही फोड़ते हुए गहलोत ने कहा की यह सामूहिक निर्णय था और सरकार के हाईब्रिड मोडल" को लेकर मामले को ट्विस्ट कर रहा है। आगे उन्होंने कहा कि मीडिया ही हमारे लोगों के इस पर आये बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहा है। यदि हमारे किसी मंत्री का कोई बयान आया है तो वह अच्छे के लिए ही आया होगा की सबसे बातचीत की जाए। सभी की भावनायें अच्छी है की संवेदनशील और पारदर्शी शासन दी जाए, इसमें पूरा मन्त्रिमंडल और सरकार इसमें लगी हुई है।

भले ही अब मुख्यमंत्री इस पर अपनी सफाई दे रहे हों लेकिन माना जा रहा है कि पिछले कुछ समय से पायलट और गहलोत आमने-सामने की लड़ाई के लिए तैयार हो रहे हैं। वैसे इन दोनों नेताओं में छत्तीस का आंकड़ा पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान ही मुख्यमंत्री पद की कुर्सी और टिकटों के बंटवारे को लेकर सामने आ गया था। दोनों के बीच जब लगातार तल्खी बढ़ने लगी और राजस्थान कांग्रेस में दो गुट बन गए तब तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को भी इन दोनों के एक जुट होने का बार बार अपनी चुनावी रैलियों में संकेत देना पड़ा था और उस वक़्त कभी ये एक साथ मोटर साइकिल पर बैठे और कभी ड्राइवर की सीट पर बैठकर गाड़ी चला रहे सचिन पायलट के बगल में बैठकर मतभेदों की खबर को झुठलाने की कोशिश करने लगे।

 जैसे तैसे राजस्थान में सरकार बनी तो मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर घमासान मचा जिसमे बाज़ी अशोक गहलोत ने मारी। आज भी सचिन और अशोक गहलोत के राजस्थान में दो गुट कांग्रेस में हैं और ये दोनों ही नेता एक-दूसरे के खेमे पर नजर भी रखते हैं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सभी 25 सीटों पर हुई हार के बाद तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच मतभेद की खायी और भी गहरी हो गयी, जिसके बाद जहां अशोक गहलोत दिल्ली में डेरा डालकर तो सचिन पायलट पार्टी काडर में अपना कद मजबूत करने में जुट गए।ऐसे में इन दोनों नेताओं के बीच चल रहे आन्तरिक खींचतान का असर राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति के साथ ही अब सरकार के कामकाज पर नजर आने लगा है।

Tags :

NEXT STORY
Top