चार साल में 50 फीसदी तक घटी डीज़ल कारों की बिक्री

देश में डीज़ल कारों की बिक्री में गिरावट देखने को मिल रही है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स (सियाम) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक बीते चार साल में डीज़ल कारों की बिक्री 50 फीसदी तक घटी है। इस साल मई में बिकने वाली कारों में डीज़ल कारों का हिस्सा 26 प्रतिशत था, वहीं साल 2012 में यह आंकड़ा 52 फीसदी था।

डीज़ल कारों की बिक्री में गिरावट की एक वजह डीज़ल बैन जैसे कदम भी हैं। पहले कम कीमत और ज्यादा माइलेज़ की वजह से लोग डीज़ल कारों को अहमियत देते थे। अब पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कम अंतर भी एक बड़ी वजह है कि लोग पेट्रोल कारों को चुन रहे हैं। अमूमन किसी कार का डीज़ल मॉडल उसके पेट्रोल मॉडल के मुकाबले करीब एक लाख रूपए तक महंगा पड़ता है। साल 2012 में डीज़ल और पेट्रोल के बीच 27.2 रूपए का अंतर था, जो अब 10 रूपए के करीब रह गया है।

   

दिल्ली-एनसीआर और केरल में 2000 सीसी से ज्यादा इंजन क्षमता वाली डीज़ल कारों पर बैन की वजह से भी ग्राहकों में संशय बैठ गया है और वे डीज़ल कारों से मुंह मोड़ रहे हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि डीलरशिपों में डीज़ल कारों का स्टॉक बढ़ता जा रहा है और कंपनियों को कारें बेचने के लिए डिस्काउंट ऑफर जैसे कदमों का सहारा लेना पड़ रहा है। हाल ही में आई टाटा टियागो की बुकिंग के आंकड़े भी यही दर्शाते हैं। कंपनी को मिल रही टियागो की बुकिंग में 70 से 80 फीसदी बुकिंग पेट्रोल मॉडल के लिए हो रही हैं।

सियाम और इंडस्ट्री विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वक्त में भी यह ट्रेंड जारी रह सकता है। इस ट्रेंड के चलते टोयोटा और महिन्द्रा जैसी कंपनियां लोकप्रिय कारों के पेट्रोल वर्जन लाने को प्रेरित होंगी।

कारदेखो

चार साल में 50 फीसदी तक घटी डीज़ल कारों की बिक्री