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धनतेरस पर भुलकर भी ना खरीदें ये चीजें

दिवाली से पहले धनतेरस के दिल लोग जमकर खरीददारी करते हैं। लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि इस दिन क्या खरीदें जिसे घर में लक्ष्मी का वास हो। ऐसे में लोग बिना सही बात जानें गलत चीजों को खरीद लेते हैं। 'धनतेरस' शब्द को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है

(Image Source: Google)

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 अक्टूबर): दिवाली से पहले धनतेरस के दिल लोग जमकर खरीददारी करते हैं। लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि इस दिन क्या खरीदें जिसे घर में लक्ष्मी का वास हो। ऐसे में लोग बिना सही बात जानें गलत चीजों को खरीद लेते हैं। 'धनतेरस' शब्द को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। हिंदी में धन का अर्थ होता है पैसा और शब्द 'तेरस' का अर्थ है तेरह। धनतेरस कार्तिक महीने का तेरहवां दिन भी होता है। धनतेरस के दिन सोना-चांदी से लेकर बर्तनों की खरीद भी होती है।

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ना खरीदें ये चीजें...- पुरानी पंरपराएं समय के साथ नए रूप भी लेती हैं। लोग अब धनतेरस पर कार, इलेक्ट्रिक सामान भी खरीदने लगे हैं। आदर्श रूप से आपको धनतेरस पर इलेक्ट्रॉनिक्स नहीं खरीदना चाहिए।- भारत के लोगों को गोल्ड से कितना प्यार है यह बताने की जरूरत नहीं। इसलिए अधिकतर लोग धनतेरस पर गोल्ड में निवेश करने पर ज्यादा विश्वास करते हैं। सिल्वर पर निवेश करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। आपको गोल्ड की खरीद से बचना चाहिए।

- मान्यता के मुताबिक धनतेरस के दिन खरीददारी करना शुभ होता है। 

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धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त....

शाम 7 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट तक

प्रदोष काल-5 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट तक

वृषभ काल-6 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 47 मिनट तक

धनतेरस के दिन पांच देवताओं, गणेश जी, मां लक्ष्मी, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा होती है। इस दिन लक्ष्मी पूजन हेतु श्रेष्ठ मुहूर्त्त प्रदोष काल एवं वृष लग्न 05:35 से 07:30 बजे रात तक है। इस दिन शुक्र तुला राशि मे स्वगृही होकर मालव्य योग के साथ विद्यमान है तथा मंगल अपनी उच्च राशि मकर में विद्यमान रहेंगे, देव गुरु बृहस्पति मंगल की राशि वृश्चिक में विद्यमान होंगे जो पूर्ण शुभफल दायक होंगे और व्यापारिक वृद्धि एवं चमक धमक में वृद्धि होगी।पूजा का मंत्र...देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान, दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामःपायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो, धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नःॐ धन्वन्तरि देवाय नमः ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि

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