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मां लक्ष्‍मी को पसंद हैं ये चीजें, धनतेरस पर इन्‍हें जरूर खरीदें

दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस मनाई जाती है। इस बार धनतेरस आज है और दिवाली 27 अक्टूबर को है। धनतेरस के दिन हर कोई नई चीज अवश्‍य खरीदता है। अगर इन 5 चीजों में से कोई एक आप खरीदते हैं तो आपके घर में बरकत बनी रहेगी। मान्‍यता है कि इन चीजों से मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (25 अक्टूबर): दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस मनाई जाती है। इस बार धनतेरस आज है और दिवाली 27 अक्टूबर को है। धनतेरस के दिन हर कोई नई चीज अवश्‍य खरीदता है। अगर इन 5 चीजों में से कोई एक आप खरीदते हैं तो आपके घर में बरकत बनी रहेगी। मान्‍यता है कि इन चीजों से मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं।

- आजकल बाजारों में चांदी के सिक्‍कों की भरमार है। ऐसे में असली और नकली की पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। बेहतर होगा कि आप किसी सरकारी बैंक से सिक्‍का खरीदें।

- धनतेरस पर चांदी के लक्ष्‍मी-गणेश खरीद सकते हैं। यह संभव न हो तो मिट्टी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदें। ध्यान रहे कि इनकी ऊंचाई अंगूठे जितनी होनी चाहिए। अगर इससे बड़ी मूर्ति खरीदकर घर के मंदिर में स्थापित करते हैं तो रोज उस प्रतिमा का विधि-विधान से पूजा-पाठ करना होगा। अन्यथा मूर्ति दोष लगता है। धनतेरस से दीपावली तक इन मूर्तियों की पूजा करें और बाद में इन्हें त‌िजोरी में रखें। न‌ियम‌ित धूप-दीप करें। इससे आपके धन में वृद्ध‌ि होगी।

- धनतेरस के दिन धनिया बीज अवश्‍य खरीदें। धनिये को धन का प्रतीक माना जाता है। लक्ष्मी पूजन के समय देवी को धन‌िया अर्प‌ित करने के बाद अपने बगीचे में कुछ बीज बो दें और कुछ को कौड़ी और गोमती चक्र के साथ त‌िजोरी में रखें।

- धनतेरस के दिन अपने घर की लक्ष्‍मी यानी अपनी पत्‍नी को उपहार में सोने-चांदी के गहने देने के अलावा लाल वस्‍त्र और सुहाग का सामान भी भेंट कर सकते हैं। यह शुभ और मंगलकारी माना जाता है।

धनतेरस के दिन पांच देवताओं, गणेश जी, मां लक्ष्मी, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा होती है। इस दिन लक्ष्मी पूजन हेतु श्रेष्ठ मुहूर्त्त प्रदोष काल एवं वृष लग्न 05:35 से 07:30 बजे रात तक है। इस दिन शुक्र तुला राशि मे स्वगृही होकर मालव्य योग के साथ विद्यमान है तथा मंगल अपनी उच्च राशि मकर में विद्यमान रहेंगे, देव गुरु बृहस्पति मंगल की राशि वृश्चिक में विद्यमान होंगे जो पूर्ण शुभफल दायक होंगे और व्यापारिक वृद्धि एवं चमक धमक में वृद्धि होगी।

पूजा का मंत्र...देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान, दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामःपायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो, धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नःॐ धन्वन्तरि देवाय नमः ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि

(Image Credit: Google) 

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