15 जून से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन

कुंदन सिंह, धनबाद (12 जून): झारखंड के धनबाद-चंद्रपुरा रेललाईन पर 15 जून से ट्रेनों का परिचालन बंद हो जायेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल के बाद रेलवे ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है। DGMS,जिला प्रशासन और रेलवे बोर्ड की रिपोर्ट पर यह कार्रवाई की गयी है। PMO के इस आदेश के साथ ही धनबाद -चंद्रपुरा रेललाईन इतिहास के पन्नों में दफन हो जायेगी। दरअसल सरकार ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी के रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की है।

बताया जा रहा है कि आग गोविंदपुर रेलवे साइडिंग से महज 22 फीट ही दूर है। इससे हर दिन लाखों यात्रियों की जान पर खतरा मंडराते रहता है। इस रूट पर शताब्दी एक्सप्रेस, मौर्य एक्सप्रेस, कामख्या एक्सप्रेस, धनबाद -इंटरसिटी एक्सप्रेस समेत 17 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं। धनबाद जिले के कई छोटे कस्बे गोधर, केंदुआ, कतरास, फुलवारटांड जैसे छोटे -बड़े 13 स्टेशन इस रुट में पड़ते हैं। रेलमार्ग के दोनों ओर कोयला खद्दान के अलावा BCCL की अवासीय कॉलोनियां भी हैं। लिहाजा, सरकार कोई खतरा मोल लेना नहीं चाहती। इसलिए ट्रेनों का परिचालन बंद करने का फैसला किया गया है। हालांकि, सरकार के इस फैसले से इस रूट पर हर दिन यात्रा करनेवाले हजारों यात्री प्रभावित होंगे।

आपको बता दें कि 22 मई को धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन पर अंतिम फैसला लेने के लिए आखिरी बैठक हुई थी। PMO में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव एन मिश्र की अध्यक्षता में हुई बैठक में धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कोयला सचिव से लेकर झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, DGMS के महानिदेशक पीके सरकार, DDG संजीवन राय, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सहित कई अधिकारी मौजूद थे। बैठक में धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन शिफ्ट करने के DGMS के प्रस्ताव पर सभी ने सहमति जतायी थी।

बीते कई सालों से इस रूट पर 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाई जाती थीं, क्योंकि पटरी धंसने की आशंका थी। यदि कभी अनहोनी हो जाती, तो इससे भारी नुकसान हो सकता था। झरिया के कोयला खदानों में 100 साल पहले लगी आग से पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है। स्टील के निर्माण के लिए जरूरी कोकिंग कोल बरबाद हो गये हैं, जिससे सरकार को राजस्व की भारी हानि हुई है। इस रूट से 24 पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनें, जिसमें हावड़ा-रांची शताब्दी एक्सप्रेस,  रांची-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस, गरीब रथ एक्सप्रेस, रांची-भागलपुर वांचल एक्सप्रेस शामिल हैं हर दिन गुजरती हैं। कोयले की ढुलाई करनेवाले कई रैक्स भी यहां से हर दिन गुजरते हैं।

धनबाद से चंद्रपुरा के बीच के करीब 14 स्टेशनों से प्रति दिन हजारों यात्री सफर करते हैं। रेलवे के आंकड़े के अनुसार प्रति वर्ष लगभग 50 लाख यात्री टिकट लेकर सफर कर रहे हैं। इससे रेलवे को लगभग 10 करोड़ रुपया से ज्यादा का राजस्व प्राप्त होता है। वहीं इसके बंद होने से रेलवे प्रशासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। यात्रियों की संख्या में भी भारी गिरावट आयेगी। इस रूट में कई कोयला रैक लोडिंग प्वाइंट भी हैं।

इस रुट से गुजरने वाली महत्वपूर्ण रेल गाड़ियां...

- हावड़ा-रांची शताब्दी एक्सप्रेस

- धनबाद-केरल अलप्पुझा एक्सप्रेस

- शक्तिपुंज एक्सप्रेस

- रांची-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस

- रांची-भागलपुर एक्सप्रेस

- रांची-भागलपुर वनांचल एक्सप्रेस

- पटना-हटिया पाटलिपुत्र एक्सप्रेस

- रांची-कामख्या एक्सप्रेस

- रांची-दुमका इंटरसिटी

- रांची-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस

- कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस

- हावड़ा-भोपाल एक्सप्रेस

- धनबाद-रांची इंटरसिटी

- धनबाद-चंद्रपुरा पैसेंजर

- धनबाद-झारग्राम पैसेंजर

     

नये रूट पर ट्रेनों का बोझ बढ़ने से रेलवे का टाइम-टेबल प्रभावित होगा। अब नयी व्यवस्था के तहत ट्रेनें गोमो से होकर गुजरेगी। धनबाद -चंद्रपुरा पर चलने वाले ट्रेनों के परिचालन प्रभावित होगा और ऐसी संभावना जतायी जा रही है कि कई ट्रेनें आधे घंटे तक देर हो जायेगी। गोमो जंक्शन में ट्रेनों का इंजन भी बदला जायेगा गोमो में रेलवे के पास इतनी क्षमता नहीं जिसकी वजह से भारी संख्या में ट्रेनें और यात्री प्रभावित होंगे।