जनमत संंग्रह के बावजूद BREXIT पर संदेह

नई दिल्ली (27 जून): ब्रेक्ज़िट पर हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बावजूद यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने पर संदेह के बादल घिर गये हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि जनमत संग्रह के महज दो दिन के भीतर सोशल मीडिया पर छिड़े अभियान में 30 लाख से ज्यादा लोग जुड चुके हैं। ब्रिटेन के कानून के मुताबिक ऐसे किसी भी अभियान में अगर एक लाख लोग जुड़ जायें तो हाउस ऑफ कॉमन में उस विषय पर चर्चा हो सकती है। इस तरह ब्रेक्ज़िट पर भी हाउस ऑफ कॉमन में फिर से चर्चा के दरवाजे खुले हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने कहा है कि ब्रेक्ज़िट पर अंतिम फैसला उनके उत्तराधिकारी को लेना चाहिए।

ब्रिटेन के संविधान विशेषज्ञ और वरिष्ठ राजनेताओँ का कहना है कि जनमत संग्रह की कोई वैधानिकता नहीं है। इसलिए यूरोपियन यूनियन से अलग होने या न होने के मुद्दे पर संविधान में मत विभाजन करवाना जरूरी है। इसीके साथ यूरोपियन लीडर्स में भी यह भय व्याप्त होगया है कि अगर ब्रिटेन अलग होता है को यूनिय़न के बिखरने की आंशका है। हाउस ऑफ लॉर्ड्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रेक्ज़िट से पहले स्कॉटलैण्ड, नॉर्थन आयरलैण्ड और वेल्स से इंग्लैण्ड को सहमति लेनी होगी।