भारत में इस बीमारी से पीड़‍ित है 60000000 लोग

नई दिल्ली (17 मई): शायद आपको पता भी ना हो और आप इस गंभीर समस्या का शिकार हो गए हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्वभर में 32 करोड़ लोग क्लीनिकल डिप्रेशन के रोगी हैं। इनमें से 6 करोड़ सिर्फ भारत में ही हैं।

इसके बढ़ते आंकड़ों के कारण डब्लूएचओ की डायरेक्टर डॉ. मार्गेट चान ने सभी देशों से अनुरोध कर इसके लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की है। इससे पीडि़त लोगों में युवाओं की संख्या ज्यादा है।

ये हैं कारण...

ये दिमाग में रसायनिक परिवर्तन के कारण होता है। इसमें सिरोटोनिन, डोपामिन आदि रसायनों की मात्रा मस्तिष्क में घटने लगती है। कुछ मामलों में यह आनुवांशिक भी होता है। इसके कारण हैं जैसे परीक्षा में फेल होना, पारिवारिक कलह, रिलेशनशिप का टूटना, करीबी की मृत्यु, आर्थिक तंगी, गंभीर हादसा, बच्चे के जन्म के बाद, लंबे समय तक रोग, कुछ दवाएं जैसे स्टीरॉयड हैं।

डिप्रेशन रोगी में गंभीर रोगों जैसे हृदय रोग, ब्रैन स्ट्रोक, हायपरटेंशन और डायबिटीज होने का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा यह व्यक्तिके सामाजिक और पारिवारिक सम्बंधों पर भी असर डालता है।

ऐसे पहचानें...

लगातार उदास रहना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना व उग्र होना, काम में रुचि न लेना, कोई भी काम करने पर खुश न होना, अत्यधिक थकान व कमजोरी महसूस होना, एकाग्रता और याद्दाश्त कमजोर होना, भूख कम या अधिक लगना, नींद कम या अधिक आना, बार-बार आत्महत्या का विचार सोचना, निरंतर नकारात्मक विचारों का आना और कुछ शारीरिक लक्षण जैसे दर्द, सांस उखडऩा, डायजेशन में प्रॉब्लम होना आदि।