नोटबंदी का असर: 2016-2017 में विकास दर रही 7.1 फीसदी

नई दिल्ली (31 मई): देश की आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ के आंकड़े आ गए हैं। 2016-17 में देश के साला आर्थिक विकास दर में गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2016-2017 में देश की आर्थिक विकास दर 7.1 फीसदी रही है। जबकि 2015-16 में विकास दर 8 फीसदी थी। खास बात ये है कि जनवरी-मार्च 2017 के दौरान विकास दर गिरकर 5.6 फीसदी हो गई जबकि जनवरी 2016 में विकास दर 8.7 फीसदी थी। 2016-17 में विकास दर के आंकड़ों से साफ है कि देश की आर्थिक विकास दर पर नोटबंदी का असर हुआ है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी रही है।


आपको बता दें कि नवंबर में नोटबंदी के चलते वित्त वर्ष 2016-17 में विकास दर में गिरावट का अनुमान पहले ही जताया गया था। नोटबंदी के फैसले के बाद विकास दर के साथ ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी GVA ग्रोथ में भी गिरावट रही। वित्त वर्ष 2017 में  GVA ग्रोथ 7.9 फीसदी से घटकर 6.6 फीसदी रही है।


अप्रैल में कोर सेक्टर की ग्रोथ में गिरावट देखने को मिली है। अप्रैल में कोर सेक्टर की ग्रोथ घटकर 2.5 फीसदी रही है। मार्च में कोर सेक्टर की ग्रोथ 5.3 फीसदी रही थी। अप्रैल में महीने दर महीने आधार पर स्टील उत्पादन, कच्चे तेल और फर्टिलाइजर्स के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल में कच्चे तेल का उत्पादन 0.9 फीसदी से घटकर -0.6 फीसदी, अप्रैल में स्टील का उत्पादन 11 फीसदी से घटकर 9.3 फीसदी रहा है। फर्टिलाइजर्स का उत्पादन -3.2 फीसदी से बढ़कर 6.2 फीसदी रहा है।


हालांकि कल ही मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक भारत में तेज विकास दर की उम्मीद जताते हुए कहा है कि अनुमान के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2017-18 में 7.5 फीसदी की विकास दर से बढ़ सकता है। जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत की विकास दर 7.7 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। कुल मिलाकर अगले 3-4 सालों में भारत की विकास दर 8 फीसदी के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले इसी सप्ताह में विश्वबैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।