नोटबंदी की वजह से इन कंपनियों को हो रहा है करोड़ों का घाटा

मुंबई (2 दिसंबर): देशभर में कैश की भारी किल्लत है। भारी तादद में लोग कार्ड के जरिए अपनी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। वहीं नगदी की कमी के बीच सरकार कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने में जुटी है। नोटबंदी के बाद मार्केट में कैश की कमी के चलते लोगों को होने वाली परेशानी से निजात के लिए सरकार ने ऑनलाइन पेमेंट पर सभी तरह के चार्ज 31 दिसंबर तक माफ करने का आदेश दिया है। इसके चलते इन कंपनियों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है।

नोटबंदी के चलते डिजिटल पेमेंट प्रॉसेसिंग कंपनियों वीजा, मास्टरकार्ड और रूपे को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। इन कंपनियों को डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट में छूट के चलते यह नुकसान झेलना पड़ रहा है। फिलहाल 2,000 रुपये से कम के ट्रांजैक्शन पर एक कारोबारी संबंधित बैंक को 0.75 फीसदी का हिस्सा देता है। वहीं, 2000 रुपये से अधिक की ट्रांजैक्शन पर कारोबारी को 1 फीसदी हिस्सा बैंक को देना होता है। खुद को मिलने वाली रकम के 0.6 फीसदी हिस्से को बैंक संबंधित कंपनियों को ट्रांसफर कर देते हैं। पेमेंट प्रॉसेसर कंपनियां 6 से 8 बेसिस पॉइंट्स तक की कमाई संबंधित बैंकों से करती हैं।

इसके अलावा नैशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को भी कार्ड जारी करने वाले बैंक से हर ट्रांजैक्शन पर 60 पैसे मिलते हैं, जबकि स्वाइप मशीन इशू करने वाले बैंक से 30 पैसे मिलते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में एटीएम और पॉइंट ऑफ सेल्स पर 2.62 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शंस हुए। अनुमान के मुताबिक बैंकों और पेमेंट प्रॉसेसर कंपनियों को इस ट्रांजैक्शन का करीब एक पर्सेंट हिस्सा मिला।