ED की 4 बैंकों पर नजर, 150 करोड़ रुपये कालेधन को सफेद करने में की मदद

मुंबई(26 दिसंबर): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार बैंकों से कहा है कि उनके अधिकारियों ने झावेरी बाजार के सोने-चांदी के एक कारोबारी को उसके 150 करोड़ रुपये के पुराने नोट खपाने में मदद की। ईडी ने कहा है कि ये सारे पैसे फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए कानूनी चैनलों में डाले गए।

-  नोटबंदी की घोषणा के तुरंत बाद ये पैसे कुछ छद्म कंपनियों के अकाउंट्स में जमा कराए गए और फिर आरटीजीएस के जरिए उन व्यापारियों के अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिए गए।

- उसका कहना है कि ये पैसे उन्हें सोना खरीदनेवाले ग्राहकों ने दिए। ईडी को संदेह है कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत है।

- ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि बैंकों ने बिना सवाल किए शेल कंपनियों के अकाउंट्स में बड़ी मात्रा में पुराने नोट जमा करवा दिए। इन अकाउंट्स के जरिए हवाला कारोबारियों और बुलियन ट्रेडर के बीच ट्रांजैक्शन हुआ। यहां तक कि अकाउंट्स में जमा इन पुराने नोटों की तुरंत गिनती भी नहीं की गई और ये रकम खाते में रिफ्लेक्ट भी हो गई। ज्यादातर मामलों में पैसे जमा किए जाने के एक दिन बाद गिनती की गई और बताए जाने से कम पैसे पाए जाने या नकली नोट मिलने के बाद शेल कंपनी के अकाउंट से उतनी राशि घटा दी गई।

- ईडी के सामने ऐसे कई उदाहरण पेश हुए हैं जब ऐसे फर्जी खातों में बड़ी रकम जमा की गई, लेकिन एक दिन बाद ही हजारों रुपये निकाल लिए गए। अधिकारी ने बताया, 'बैंक अधिकारियों ने नोटों की गिनती किए बिना ही डिपॉजिट रिसीट्स जारी कर दिए। बाद में पैसे कम पड़ने या नकली नोट निकलने पर अकाउंट से पैसे घटाकर करेक्शन किया गया।'

- ग्राहकों से पैसे मिलने का दावा कर रहे ये व्यापारी सबूत नहीं दे पाए। उनका कहना है कि ग्राहकों ने उन्हें फोन पर ऑर्डर्स दिए थे और उन्होंने अनजान शख्स को सोना सौंप दिया था। ईडी को व्यापारियों की ऐसी कहानियों पर विश्वास नहीं हो रहा है, इसलिए उनके अकाउंट्स फ्रीज कर दिए गए। लेकिन, तब तक व्यापारियों ने ज्यादातर रकम दूसरे अकाउंट्स में ट्रांसफर कर लिए थे और ईडी महज 8 करोड़ रुपये फ्रीज कर पाया।

-एजेंसी ने पाया कि छद्म कंपनियों से जुड़े ज्यादातर लोग फर्जी हैं। इन कंपनियों ने व्यापारियों के खातों में किस्तों में पैसे डालने के सिवा दूसरा कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया। एक अधिकारी ने बताया कि नोटबंदी के बाद कई लोग अपनो काले धन को सोने में लगा दिया। बहरहाल, झावेरी बाजार जैसा ही मामला एक सप्ताह पहले कल्बादेवी में सामने आया था जहां कुछ शेल अकाउंट्स में 70 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे।