नोटबंदी के दौरान पैसा जमा करने वाले 18 लाख लोग फंसे, कहीं आप भी तो नहीं!

नई दिल्ली (2 अगस्त): नोटबंदी के समय में लोगों ने बड़ी तादाद में अपने बैंक खातों में पैसों को जमा कराया। जिसके बाद इस वित्त वर्ष में इनकम टैक्‍स भरने वालों लोगों की संख्या में 33 लाख का इजाफा हुआ। इस बात की जानकारी वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा को एक लिखित जबाव में दी।

नवंबर-2016 से 31 मार्च 2017 तक कुल 1.96 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में 1.63 करोड़ और वित्त वर्ष 2014-15 में 1.23 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए थे। उन्‍होंने कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य जीडीपी को बड़ा, स्वच्छ और वास्तविक बनाना था। हालांकि सरकार के आंकड़ों से यह पता चलता है कि नए करदाताओं को जोड़ने की यह संख्या वित्त वर्ष 2014-15 से 2015-16 के बीच जोड़े गए नए करदाताओं की संख्या से कम है। उस साल 40 लाख अतिरिक्त रिटर्न दाखिल किए गए थे।

एक अलग जवाब में मंत्री ने कहा कि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है कि भारत में कितना काला धन है। हालांकि नोटबंदी के बाद आयकर विभाग ने नवंबर-2016 से मार्च-2017 तक 900 समूह के लोगों की खोज की, जिसके बाद 900 करोड़ की संपत्ति और 7,961 करोड़ रुपए के अघोषित धन का खुलासा किया। मंत्री ने कहा कि 18 लाख लोगों की पहचान की गई, जिनकी बैंक में नगदी जमा करने का आंकड़ा उनके टैक्‍स प्रोफाइल से मेल नहीं खाता है। उन्हें इस संबंध में ईमेल/एसएमएस भेजे गए हैं।