नोटबंदी से छिन गया काम तो 2000 के लिए करा ली नसबंदी...

अंशुल राघव, अलीगढ़ (27 नवंबर): नोटबंदी की मार दिहाड़ी मजदूरों पर ऐसी पड़ी है कि घर चलाने के लिए वो नसबंदी कराने के लिए कतार में खड़े हैं। काम नहीं मिलने के बाद पाई पाई को मोहताज हुए मेहनतकश 2000 रुपये के नए नोटों के लिए नसबंदी करा रहे हैं।

नोटबंदी के बाद से उत्तर प्रदेश में नसबंदी के मामले तेजी से बढ़े हैं और ऐसा जागरूकता की वजह से नहीं, बल्कि नोटबंदी के बाद पैदा हुई पैसों की किल्लत की वजह से हो रहा है। नसबंदी के बदले 2000 रुपये के अनुदान के लिए लोग नसबंदी करा रहे हैं। दिहाड़ी मजदूरी पर काम करने वाले लोगों को काम नहीं मिल रहा है और काम मिल भी रहा है तो पैसे नहीं मिल रहे हैं।

अलीगढ़ में एक मजदूर को कई दिनों से काम नही मिला तो घर में भुखमरी के हालात पैदा हो गए। गरीब मजदूर ने लोगों के सामने मदद के लिए हाथ फैलाए काम मिला नहीं और मदद के लिए भी कोई तैयार नहीं हुआ तो वो 2000 रुपये के लिए नसबंदी कराने पहुंच गया।

नसबंदी कराने वाले पुरुष को 2000 रुपये और महिला को 1400 नगद प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अलीगढ़ के पूरन अस्पताल में अपनी पत्नी की नसबंदी कराने गए थे, लेकिन डॉक्टरों ने पत्नी की नसबंदी के लिए मना कर दिया तो उन्होंने रुपये की जरूरत देखते हुए अपनी नसबंदी करा ली।

अलीगढ़ के खैर इलाके के गांव नहरौला में रहने वाले पूरन शर्मा के परिवार में दो बेटे एक बेटी और मूक बधिरपत्नी हैं। उसके पास न तो खेती है, न ही आजकल मजदूरी मिल रही है। दिहाड़ी मजदूरी का काम नहीं मिलने से पाई पाई को मोहताज हो गए तो नसबंदी कराकर 2000 का इंतजाम किया।

अलीगढ़, मथुरा, आगरा, गोरखपुर में भी मजदूर बड़ी तादात में नसबंदी करा रहे हैं। अलीगढ़ में पिछले साल नवंबर में कुल 92 लोगों ने नसबंदी कराई थी। नोटबंदी के बाद नवंबर में अबतक 176 लोग नसबंदी करवा चुके हैं। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी को सरकार प्रोत्साहित करती है, लेकिन नोटबंदी की वजह से मजबूर होकर नसबंदी कराने की खबर से पता चलता है कि दिहाड़ी मजदूर किस कदर मुश्किल में आ गए हैं।