नोटबंदी: SC का सरकार से सवाल, नोट जमा कराने का कानूनी विकल्प क्यों नहीं दिया

नई दिल्ली ( 22 मार्च ): देश के सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किया है कि उसने लोगों को नोटबंदी के बाद अमान्य हुए पुराने नोट 31 दिसंबर के बाद जमा करने का कानूनी विकल्प क्यों नहीं प्रदान किया। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि भारत से बाहर रह रहे लोगों के अलावा दूसरों को 31 मार्च तक नोट जमा करने की इजाज़त क्यों नहीं दी गई?


प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने सरकार से पूछा कि जो लोग 31 दिसंबर तक अपने पुराने नोट जमा नहीं करा पाए, उनके लिए ऐसी व्यवस्था का प्रावधान क्यों नहीं किया गया।


सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में शपथपत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने सवाल किया, "आपने (कानून के तहत) एक और खिड़की खोलने का विकल्प क्यों नहीं दिया। आपके पास 20 कारण हो सकते हैं।"


अदालत ने यह सवाल तब किया जब  एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा संसद ने सरकार को विकल्प दिया था, लेकिन सरकार ने उसे नहीं अपनाने का फैसला किया, क्योंकि उसे ऐसा करना उचित नहीं लगा।