कैशलेस के फायदे गिनाने सड़क पर उतरी मोदी 'सेना'

नई दिल्ली (18 दिसंबर): नोटबंदी के बाद अब मोदी सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कैशलेस पर मोदी की पाठशाला के बाद सत्र खत्म होते ही सरकार के मंत्री और बीजेपी सांसद कैशलेस के फायदे गिनवाने के लिए सड़कों पर उतर चुके हैं। मंत्री राधा मोहन सिंह, राम विलास पासवान, बंडारु दत्तात्रेय जैसे बड़े नेता पीएम मोदी के इस सपने को साकार करने के लिए मैदान में कूद चुके हैं और जागरूकता फैलाने के लिए लोगों के बीच कैशलेस का डेमो दिखा रहे हैं।

नोटबंदी का दर्द झेलने वालों का दर्द कम करने के लिए सरकार ने कैशलेस ट्रांजेक्शन की मुहिम छेड़ दी है। लाइन में लगे लोगों की झंझट और झिझक दूर करने की इस मुहिम में पीएम मोदी की पाठशाला से लिए गुरुमंत्र के साथ मोदी के मंत्री और सांसद लोगों को जागरूक करने के लिए मैदान में कूद चुके हैं। सत्र खत्म होते ही शनिवार को कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह मदर डायरी पहुंचे और कैशलेस ट्रांजेक्शन के फायदे गिनवाने लगे।

पीएम मोदी की पाठशाला की पाठ को अमली जामा पहनाने के लिए राम विलास पासवान भी दिल्ली की सड़कों पर जूस पीते हुए नजर आए और मोदी सरकार के कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिशों के तहत जूस लेने के लिए डेबिट कार्ड से भुगतान किया। पासवान ने लूटियन्स दिल्ली के उद्योग भवन के बाहर जूस की एक दुकान में अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करके जूस पिया।

हैदाराबाद में श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने पीएम मोदी के दूसरे सपने कैशलेस टांजेक्शन को साकार करने के लिए मोर्चा संभाला। कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए जागरूरकता कैंप लगाकर लोगों के इसके फायदे गिनवाए। हिंदुस्तान का एक बड़ा सच ये भी है कि लोग डिजिटल ट्रांजैक्शन से बहुत हिचकते हैं और एक कड़वा सच ये भी है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन के हाईवे पर हिंदुस्तान दुनिया के दूसरे देशों से बहुत पिछड़ा हुआ है।

इसकी कई वजहें भी हैं...

- देश की करीब 25% आबादी के पास अभी भी बैंक में कोई खाता नहीं है।

- वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, हिंदुस्तान के 43% खाते में ट्रांजैक्शन बहुत कम होता है।

- सिर्फ 7% खाता धारक ही बेहिचक ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं।

- देश में स्मार्ट फोन पर इंटरनेट इस्तेमाल करनेवालों की तादाद बहुत कम है।

- हिंदुस्तान की बड़ी आबादी इस स्थिति में नहीं है कि वो मोबाइल पर इंटरनेट बैंकिंग की सुविधाओं का फायदा उठा सके।

भले ही हिंदुस्तान का आम आदमी डिजिटल ट्रांजैक्शन से हिचक रहा हो। उसके लिए अभी तैयार नहीं हो, लेकिन सरकार की ओर से लगतार डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए नए-नए रास्ते दिखाए जा रहे हैं।