नोटबंदी के दौरान ठिकाने लगाए 840000000 रुपये, ऐसे पकड़े गए


नई दिल्ली (8 नवंबर): नोटबंदी के दौरान लोगों ने काले धन को सफेद करने में हर जुगाड़ लगाया, लेकिन मोदी सरकार ऐसे लोगों को छोड़ने के मूड में कतई नहीं है। इसी कड़ी में  नोएडा के नामी लाल महल ज्वैलर्स आए है, जिन्होंने 431 किलो ड्यूटी फ्री गोल्ड खपाकर 839.85 करोड़ रुपये हवाला के जरिए इधर-उधर किए।

मिली खबर के अनुसार, ज्वैलर्स ने करीब 840 करोड़ का सोना और उससे बनी जूलरी नोएडा से दुबई, पक्के कागजों पर भेजी और भूल गया। वहां से इसका पेमेंट नहीं आया। यह खुलासा डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की पड़ताल में हुआ है। आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद डीआरआई ने 22 व 23 दिसंबर को नोएडा स्पेशल इकनॉमिक जोन में स्थित लाल महल जूलर्स के ठिकानों पर छापे मारे थे। तब पता चला था कि इस फर्म ने 431 किलो ड्यूटी फ्री गोल्ड नोटबंदी के बाद घरेलू बाजार में खपा दिया।

डीआरआई ने जब कंपनी की एमडी अनीता गर्ग के दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि उन्होंने बैंक में 12 करोड़ 55 लाख 73 हजार 212 यूएस डॉलर का भुगतान आने से जुड़ी ऐप्लिकेशन लगा रखी है। पड़ताल में यह रकम करीब 839 करोड़ 85 लाख रुपये निकली। डीआरआई ने श्री लाल महल जूलर्स की एमडी अनीता गर्ग को जांच में सहयोग के लिए 13 बार समन भेजा, लेकिन वह टालती रहीं। प्रेमचंद गर्ग और उनका बेटा देवाशीष गर्ग भी दावा करते रहे कि उनका लाल महल जूलर्स से कोई संबंध नहीं है। डीआरआई सूत्रों के अनुसार, तीनों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिल गए हैं।

डीआरआई ने पड़ताल की तो पता चला कि लाल महल जूलर्स के मुख्य कर्ताधर्ता और अनीता गर्ग के पति प्रेमचंद गर्ग ने ही दुबई में डायमंड इंटरनैशनल ट्रेडिंग एफजेडसी कंपनी बनाई है। प्रेमचंद ही उसका काम देखता है। प्रेमचंद की बेटी ईशा गर्ग के नाम पर भी दुबई में श्री लाल महल जूलर्स एलएलसी यूएई नाम की फर्म है। इसका खुलासा इनके अकाउंटेंट बलदेव चतुर्वेदी के ईमेल अकाउंट से हुआ है।