20 लाख मोबाइल बनेंगे स्वाइप मशीन

नई दिल्ली(5 दिलंबर): देश को कैशलेस बनाने की तैयारी में सरकार ने व्यापार संगठनों के साथ मिलकर मार्च तक करीब 20 लाख ट्रेडर्स को डिजिटल मोड में शिफ्ट करने का लक्ष्य बनाया है। सरकार का जोर मौजूदा स्वाइप मशीनों वाले पॉइंट ऑफ टर्मिनल से भी सस्ते और मामूली ट्रांजैक्शन कॉस्ट वाली तकनीक मुहैया कराने पर है। इसके लिए फिलहाल एम-पीओएस और क्विक रिस्पॉन्स (क्यूआर) कोड पर पूरा फोकस है। 

- कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर डिजिटल पेमेंट पर देश भर के व्यापारियों के दो दिन के सम्मेलन में नीति आयोग और डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

- उन्होंने संकेत दिए कि इस मोड में आने वाले ट्रेडर्स के लिए सरकार कुछ और वित्तीय लाभों की घोषणा कर सकती है। सरकार ने व्यापार संगठनों के साथ ही कई बैंकों और पेमेंट टेक्नोलॉजी फर्मों को भी साथ लिया है। 

- डीआईपीपी के सचिव रमेश अभिषेक ने बताया, ‘इसे नोटबंदी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। लेस-कैश कैंपेन की शुरुआत मई में ही हो गई थी। कैट की मदद से अब तक करीब 20 लाख ट्रेडर्स को इसके लिए तैयार कर लिया गया है। अगर वे अगले तो-तीन महीनों में डिजिटल ट्रांजैक्शन करने लगे तो, उन्हें देखकर दोगुनी तादाद में ट्रेडर अपने आप जुड़ जाएंगे।’

- कैंपेन में शामिल पेमेंट टेक्नोलॉजी फर्म मास्टरकार्ड के वाइस प्रेसिडेंट (ग्लोबल पॉलिसी अफेयर्स) रविंदर एस. अरोड़ा ने बताया, ‘आम स्वाइप मशीन के मुकाबले एम-पीओएस ज्यादा मुफीद हैं। इसमें एक छोटी डिवाइस को मोबाइल से कनेक्ट करके कार्ड स्वाइप किया जा सकता है। लेकिन जहां इंटरनेट कनेक्शन नहीं है, वहां क्यूआर कोड कारगर हो रहा है। इसके तहत हर दुकानदार एक बारकोड इमेज डाउनलोड कर अपनी दुकान पर लगाएगा। ग्राहक अपना मोबाइल उस इमेज पर स्वाइप करके पेमेंट कर देगा।’

- कैट के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि 30 राज्यों के व्यापार प्रतिनिधियों ने सहमति जताई है कि ट्रेडर्स को कम से कम कैश इस्तेमाल की आदत डाल लेनी चाहिए। इसके बिना जीएसटी में जाना भी संभव नहीं है। लेकिन नोटबंदी के बाद जो हालात बने हैं, वहां कोई दुकानदार ग्राहक को सिर्फ इसलिए जाते नहीं देख सकता कि उसके पास कैश नहीं है। सम्मेलन में इस बात पर भी सहमति बनी कि सरकारें ट्रेडर्स को इसके एवज में कुछ सहूलियतें दें। साथ ही केंद्र और राज्य स्तर पर सभी वित्तीय कमेटियों में कम से कम दो व्यापार प्रतिनिधि शामिल किए जाएं। ट्रेडर्स ने इस बात भी चिंता जताई कि अभी तक कैशलेस विवादों के निपटारे के लिए पर्याप्त कानून नहीं हैं। ट्रेडर और ग्राहक के पैसे की सुरक्षा के लिए भी सरकार को वैधानिक कदम उठाने होंगे।