Exclusive: इनकम टैक्स विभाग की रडार पर हैं ये 6 तरह के लेन-देन...

नई दिल्ली (19 जनवरी): कालेधन के खात्मे के लिए मोदी सरकार ने नोटबंदी का ऐलान किया, लेकिन ये दांव ज्यादा असरदार नहीं रहा। 500 और हजार रुपए के 97 फीसदी पुराने नोट बैंकों में जमा करा दिए गए। इससे आयकर विभाग में हड़कंप मचा है। अब कालेधन के कुबेरों की पहचान के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।


नोटबंदी के दौरान ब्लैकमनी को ठिकाने लगाने वालों ने चाहे जितना दिमाग लगाया हो, लेकिन अब सबकी बत्ती गुल होने वाली है। कालेधन के हर चोर दरवाज़े पर अब सरकार की नज़र है। ब्लैकमनी को ह्वाइट करने वाले अब नहीं बचेंगे। दो नंबर के पैसे को एक नंबर करने वाले अब नहीं बचेंगे।


नोटबंदी के बाद आयकर विभाग ने सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। आयकर विभाग की नजर उन 6 रास्तों पर है, जिसके जरिए ब्लैकमनी को ठिकाने लगाने का सबसे ज्यादा शक है।


- वैसे KYC खाते जिसमें 9 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच 2 लाख रुपए या इससे ज्यादा की रकम जमा हुई हो उसकी जांच होगी।

- वो खाते जिनमें लंबे समय से लेनदेन नहीं हो रहा था, लेकिन नोटबंदी के दौरान अचानक 1 लाख या इससे ज्यादा के पुराने नोट जमा कराए गए।

- वो जनधन या नाबालिगों के खाते और जिनमें 50 हजार तक या उससे ज्यादा के पुराने नोट जमा कराए गए।

- यही नहीं पुराने नोटों से जिसने भी 1 लाख या इससे ज्यादा को लोन चुकाया या फिर बैंक ड्राफ्ट बनवाया उन्हें भी इसका जवाब देना होगा।

- इसके साथ ही जिसने भी 30 हजार रुपए से ज्यादा का हाउंसिंग टैक्स और 1 लाख रुपए से ज्यादा का कमर्शियल टैक्स पुराने नोटों में जमा करवाया है उसकी छानबीन की जा रही है।

- पुराने नोटों में 10 हजार रुपए से ज्यादा के बिजली और पानी के बिल जिसने भी जमा कराए अब वो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर हैं।


दरअसल सरकार को नोटबंदी से 3 से 4 लाख करोड़ रुपए के कालेधन के खात्मे की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 500 और हजार के करीब 15 लाख करोड़ के पुराने नोटों में से 97 फीसदी नोट बैंकों में जमा करा दिए गए। सरकार का अनुमान है कि पुराने नोटों के जरिए करीब 5 लाख करोड़ रुपए की ब्लैकमनी को ठिकाने लगा दिया गया।


ऐसे में अब एक ही रास्ता है कि जिस किसी ने भी ब्लैकमनी को बैंकों में जमा करवाया उसका कच्चा चिट्ठा खोला जाए। जिसकी शुरूआत हो गई है।