नोटबंदीः अप्रैल से पहले राहत के आसार नहीं !

नई दिल्ली (14 दिसंबर): 8 नवंबर 2016 को लागू किए गए नोटबंदी के फैसले के बाद आम लोगों को हो रही दिक्‍कतों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से एक भावुक अपील की थी। इसमें उन्‍होंने आम जनता से 50 दिनों का वक्‍त मांगा था और भरोसा दिलाया था कि इतने दिनों में नोटबंदी के कारण जो दिक्‍कतें हो रही हैं, वे खत्‍म हो जाएंगी। 50 दिन के इस डेडलाइन को पूरा होने में अब महज 15 दिन बचे हैं, लेकिन फिलहाल जो हालात हैं उन्‍हें देखकर ऐसा लगता नहीं कि इस वक्‍त के भीतर पूरी तरह राहत मिल जाएगी। अगर आंकड़ों को ध्‍यान में रखकर बात की जाए तो आम लोगों को अप्रैल 2017 से पहले पूरी तरह राहत नहीं मिल पाएगी।

दरअसल, नोट छापने के लिए प्रिंटिंग प्रेसों की मौजूदा क्षमता और करंसी को वितरित करने संबंधी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों पर गौर किया  जाए तो मौजूदा रफ्तार के मुताबिक, मोदी ने जो डेडलाइन तय की गई, उसे पूरा नहीं किया जा सकेगा। देश भर के बैंकों और एटीएम में पर्याप्‍त पैसा हो, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कितना पैसा फिर से सर्कुलेशन में लाना चाहती है।

अगर सरकार सिस्‍टम में 9 लाख करोड़ रुपये डालना चाहती है (जितना पैसा निकाला गया है उसका 35 प्रतिशत कम) तो ऐसा करने में उसे मई 2017 तक का वक्‍त लग जाएगा। दूसरी तरफ, अगर सरकार वापस लिए गए 14 लाख करोड़ रुपये की पूरी रकम फिर से सिस्‍टम में लाना चाहती है तो इस काम में अगस्‍त 2017 तक का वक्‍त लग सकता है। इस सारी समस्‍या का जो मूल है, वह 500 रुपये का नोट है जिसकी प्रिंटिंग फिलहाल पर्याप्‍त मात्रा में नहीं हो पा रही है।