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नोटबंदी: बैंकों की लोन ग्रोथ 54 साल के निचले स्तर पर

नई दिल्ली(26 दिसंबर): लोन ग्रोथ घटकर 54 साल के लो लेवल पर पहुंच गई है। नोटबंदी के बाद बिजनस सेंटीमेंट डाउन होने के चलते कंपनियों ने लोन लेना कम कर दिया है, जबकि आम लोगों ने रोजमर्रा के सामान को छोड़कर दूसरी खरीदारी कम कर दी है। हालांकि, एचडीएफसी बैंक और ऐक्सिस बैंक का दावा है कि कमजोर लोन ग्रोथ का सबसे बुरा दौर गुजर गया है। उनके मुताबिक, कैश की सप्लाई नॉर्मल होने और बिजनस सेंटीमेंट सुधरने के बाद लोन की मांग तेजी से बढ़ेगी।

-आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 9 दिसंबर को खत्म हुए पिछले 15 दिनों में लोन ग्रोथ 6 पर्सेंट से नीचे 5.8 पर्सेंट पर चली गई। यह 1962 के बाद की सबसे कम ग्रोथ है। उस वक्त बैंकों का राष्ट्रीयकरण नहीं हुआ था। 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को बैन किए जाने के बाद बैंकों के पास डिपॉजिट बढ़ा है। बैंक 13 लाख करोड़ से अधिक के डिपॉजिट पर ब्याज चुका रहे हैं, जबकि लोन की मांग बहुत कम हो गई है। एसबीआई जैसे कुछ बैंकों ने तो लोन ग्रोथ बढ़ाने के लिए इंट्रेस्ट रेट में कटौती भी की है, लेकिन अभी तक इसका बहुत असर नहीं हुआ है क्योंकि कंपनियां नोटबंदी की समस्या से जूझ रही हैं। हालांकि, अगली तिमाही से रिटेल लोन की मांग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।


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