देश के कैशलेस बनाने के लिए पीएम मोदी को करने होंगे ये काम...

नई दिल्ली (7 दिसंबर): नोटबंदी के एक महीना पूरे होने में अब महज एक दिन बचे हैं। लेकिन देशभर नगदी की भारी किल्लत है। कमोबेस हर जगह हालात जस के तस बने हुए हैं।  जैसी उम्मीद थी, सरकार को वैसी सफलता मिलते नहीं दिख रही है। आम लोगों की परेशानी अभी भी बरकरार है। बड़े से लेकर छोटे शहर और गांव, कस्बों तक में लोग कैश के लिए परेशान हैं। 

नोटबंदी के बाद मोदी सरकार देश में कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दे रही है। भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने के लिए सरकार इस जुगत में जुटी है कि सभी तरह का पेमेंट डिजिटल तरीके से हो। सरकार लोगों से रोजमर्रा की हर जरूरतों के लिए डिजिटल पेमेंट को अपनाने के लिए जोर दे रही है। सरकार की मंशा देश में करंसी के चलन को GDP के मुकाबले 7-8 फीसदी तक रखना है। अमेरिका, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया समेत तमाम डेवलप इकोनॉमी में GDP और कैश का औसत तकरीबन इसी के आसपास है। 

देश के सबसे बड़े बैंक SBI के इकोनॉमिक रिसर्च डिपॉर्टमेंट की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट डीमोनेटाइजेशन के बाद लाइफ के मुताबिक कैशलेस इकोनॉमी के रुप में भारत को डेवलप करने के लिए कई अहम चैलेंज का सामना करना पड़ेगा। इसके लिए उसे देश में प्वाइंट ऑफ सेल मशीन लेकर क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग, प्रीपेड इंस्ट्रमेंट का बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में अभी डिजिटल ट्रांजैक्शन का साइज 1.2 लाख करोड़ रुपए है। यानी देश में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, मोबाइल वैलेट, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग आदि से 1.2 लाख करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन किया जा रहा है। अगर कैशलेस इकोनॉमी के रुप में भारत को डेवलप करना है, तो यह ट्रांजैक्शन करीब 3.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाना होगा।

अभी डिजिटल पेमेंट क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग, मोबाइल वैलेट आदि से किया जाता है। जिनके जरिए देश में करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। इसे बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपए ट्रांजैक्शन करने के लिए सरकार को डिजिटल पेमेंट के तरीकों में इस तरह बदलाव करने होंगे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर सरकार कैशलेस इकोनॉमी का सपना पूरा करना चाहती है, तो उसे कई तरह से इंसेंटिव देने होंगे। मसलन डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वाले को टैक्स देने में छूट देनी चाहिए। इसी तरह सरकारी सेवाओं में कैश पेमेंट को बैन कर देना चाहिए। इसके अलावा पीओएस मशीन इन्स्टालेशन को भी अनिवार्य करना होगा।