कृत्रिम बारिश से स्मॉग हटाएंगे केजरीवाल!


नई दिल्ली (6 नवंबर): राजधानी में स्मॉग के कारण लोगों का घर से निकला मुश्किल हो गया है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने स्मॉग से निपटने के लिए हर संभव कदम उठाने की बात करते हुए कृत्रिम बारिश कराने की बात भी कही है। हालांकि इसके लिए वह केंद्र सरकार से बात करेंगे।

दरअसल, बारिश होने से स्‍मॉग की समस्‍या से जल्‍द निजात मिल जाएगी। कृत्रिम बारिश को क्लाउड सीडिंग भी कहा जाता है।

ऐसे होती है कृत्रिम बारिश
इस तरह की बारिश करवाने के लिए छोटे आकार के रॉकेटनुमा यंत्र में केमिकल भर कर आकाश में दागे जाते हैं। केमिकल के रूप में सिल्‍वर आयोडाइड का इस्‍तेमाल किया जाता है। यह केमिकल आकाश में छितराए हुए बादलों से रासायनिक क्रिया कर बारिश करता है। इस प्रयोग से सामान्य तौर पर 20 किलोमीटर के दायरे में बारिश होती है। वैज्ञानिक सिद्धांत के मुताबिक, केमिकल से भरा रॉकेट आकाश में दागे जाने के 45 मिनट बाद कृत्रिम बारिश होती है।

हेलिकॉप्‍टर का भी होता है यूज
कृत्रिम बारिश कराने के लिए कई जगह हेलिकॉप्टर तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, रॉकेट के मुकाबले यह तकनीक थोड़ी महंगी है। इसके अलावा रॉकेट तकनीक में सफलता की संभावना जहां 80 फीसदी है वहीं हेलिकॉप्टर तकनीक में यह महज 40 फीसदी ही है।

2003 में हुई थी कृत्रिम बारिश
महाराष्ट्र में इससे पहले 2003 में कृत्रिम बारिश कराई गई थी। तब सरकार ने 5 करोड़ 40 लाख रुपये खर्च करके 22 तालुकाओं में कृत्रिम बारिश का प्रयोग किया था। यह प्रयोग सफल रहा था।