नर्सरी एडमिशन पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली(14 फरवरी): दिल्ली सरकार के नोटिफिकेशन पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है। सरकार के नेबरहुड क्राइटेरिया को भी हाई कोर्ट ने रद्द कर किया। कोर्ट के फैसले के बाद प्राइवेट स्कूलों को बड़ी राहत मिली है।

- हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार का नोटिफिकेशन पेरेंट्स से उनके अपनी पसंद के स्कूल मे दाखिला का अधिकारों छीन रहा था,लिहाजा इसे रद्द किया जाता है।

- हाई कोर्ट ने कहा कि क्वालिटी एजुकेशन के नाम पर सरकार प्राइवेट स्कूलों के साथ मनमानी नहीं कर सकती है।

- हाई कोर्ट के इस फ़ैसले से इस साल नर्सरी एडमिशन को लेकर रास्ता साफ हो गया हैं।सरकार के नोटिफिकेशन के बाद पैदा हुआ संशय ख़त्म हो गया है। और अभिवावको और स्कूलों के लिए ये बड़ी राहत है।

- दिल्ली होईकोर्ट ने नर्सरी एडमिशन पर याचिकाकर्ताओं,अभिभावकों, प्राइवेट स्कूलों और राज्य सरकार की दलीलें करीब डेढ़ महीने सुनने के बाद ये फ़ैसला दिया है। प्राइवेट स्कूलों  ने दिल्ली सरकार की नर्सरी में दाखिले के लिए एलजी के नोटिफिकेशन को हाइकोर्ट मे चुनौती दी थी।

- नोटिफिकेशन मे सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को कहा गया था कि डीडीए की जमीन पर बनेस्कूल नर्सरी में दाखिला लेने के लिए नेबरहुड क्रेटरिया को लागू करेंगे।

-इस नोटिफिकेशन से दिल्ली के 298 निजीस्कूल प्रभावित हो रहे थे। स्कूलों की एक्शन कमेटी का कहना था कि उनकेहितों को नुकसान नहीं होना चाहिए और सरकार को छात्रोंके बीच कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए।बच्चे के माता पिता के पास ये अधिकार होना चाहिए की वो अपने बच्चे को किस स्कूल मे पढ़ाये।उनका कहनाथा कि उन्हें डीडीए की जमीन आवंटित करते समय भीनेबरहुड क्रेटेरिया तय नहीं किया गया था। हाईकोर्ट ने केंद्रऔर दिल्ली सरकार से कहा था कि वे स्कूलों का आवंटनपत्र दिखाएं जिसके आधार पर नेबरहुड क्रेटेरिया तय किया गया है।

-स्कूलों का कहना था कि सरकार कानोटिफिकेशन कानून के मुताबिक नहीं है और ये मौलिकअधिकारों का उल्लंघन करते हैं।