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से नो टू प्लास्टिक को लेकर रेलवे का बड़ा एक्शन प्लान

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के कश्मीरी गेट साइड में बना ये रेलवे का बेस किचन, जहां, फटाफट खाने के पैकेट तैयार हो रहे हैं।

कुन्दन सिंह, न्यूज़ 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(20 सितंबर):  इन दिनों देशभर में प्लास्टिक के खिलाफ लोगों में जागरुकता फैलाई जा रही है। 2 अक्टूबर, 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के दिन देशभर में सिंगल-यूज प्लास्टिक बैन होने जा रहा है। इस तारीख से सिंगल-यूज प्लास्टिक से बनने वाले छह प्रोडक्ट्स- प्लास्टिक बैग, स्ट्रॉ, कप्स, प्लेट, बोतल और शीट्स बंद होने जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 तक भारत को सिंगल-यूज प्लास्टिक से फ्री करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने इस साल लाल किले से अपने भाषण में देशवासियों से सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को बंद करने की अपील की है। नरेंद्र मोदी की अपील के मद्देनजर रेलवे ने अपने नेटवर्क में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने का फैसला किया है।

इसी कड़ी में रेलवे एल्युमिनियम फॉयल को भी बाय-बाय करने जा रहा है। अब रेलवे खाना पैक करने के लिए इको फ्रेंडली पैकेट के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। फिलहाल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बेस किचन से इसकी शुरुआत की जा रही है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के कश्मीरी गेट साइड में बने बेस किचन में दिल्ली से खुलने वाली तमाम प्रीमियम ट्रेनें राजधानी, शताब्दी और दूरंतो एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए खाना पैक होते हैं। पहले यहां एल्यूमिनियम फॉयल में खाना पैक होता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के प्लस्टिक बैन अपील के बाद यहां इको फ्रेंडली पैकेट का प्रयोग हो रहा है।

बताया जा रहा है कि बागसे की ये पैकेजिंग सुगरकेन की जूस निकलने के बाद बचे वेस्ट से तैयार की गई है, जो पूरी तरह से इको फ्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल है। इसके साथ ही आईआईआसीटीसी के इस किचन में मैटेरियल और पैकेजिंग में भी प्रयोग में आने वाली जुट के बैग का प्रयोग किया जाता है, जोकि इको फ्रेंडली हो। प्रधानमंत्री के प्लास्टिक बंद अभियान को सफल बनाने में रेलवे की बड़ी जिम्मेदारी है। रेलवे को इसबात का आभास है और वो इसको लेकर एक रोड मैप भी तैयार कर रहा है।

रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता आरडी बाजपेयी का कहना है कि किचन की बारी तो बाद में आती है। रेलवे में सबसे ज्यादा प्लास्टिक के वॉटर बॉटल का इस्तेमाल होता है। एक आंकड़े के मुताबिक रोजाना देशभर के रेल नेटवर्क में करीब 25 से 30 लाख वाटर बोतल प्रयोग में लाई जाती हैं, जिनको हैंडल करना रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती है। फिलहाल इसे रिक्लेकट करने और इसको रिसाइकिल करने के लिए बड़े पैमाने पर बोतल क्रेशिंग मशीनें लगाई जा रही हैं। 

इसके अलावा देशभर के करीब 400 स्टेशनों पर प्लास्टिक के कप के बदले मिट्टी के कुल्हड़ में चाय बेचने की तैयारी हो रही है। वुडेन स्पून और कागज का स्ट्रॉ प्रयोग के लाने के लिए निर्देश भी जारी किए गए हैं। इतना ही नहीं 2 अक्टूबर से दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे को देश का पहला प्लास्टिक फ्री जोन स्टेशन बनाने की योजना पर भी रेलवे जोरशोर से काम में जुटी है।

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