ट्यूशन फीस और रहने के किराए के लिए 'शुगर डैडी' का सहारा

नई दिल्ली (30 मई) :  कैंडिस कशानी इस वसंत में लॉ स्कूल से ग्रेजुएट हुई हैं। लेकिन उन पर अपने साथियों की तरह कोई कर्ज़ नहीं है। कशानी को पहले साल स्कॉलरशिप के बावजूद ट्यूशन फीस और अन्य खर्चों के लिए 50 हज़ार डॉलर और की ज़रूरत थी। इसके लिए कशानी ने 'शुगर डैडी'  को ढूंढने का रास्ता निकाला। इसमें डेटिंग वेबसाइट पर ऐसी महिलाओं, जिन्हें पैसे की ज़रूरत होती है, का संपर्क ऐसे पुरुषों से करा दिया जाता है जो 'साथ पाने'  और 'इंटीमेट होने' के बदले वित्तीय मदद के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसे पुरुषों को ही 'शुगर डैडी' कहा जाता है।    

अब तीन साल बाद और कई 'शुगर डैडी' से संपर्क के बाद कशानी विलानोवा यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुई हैं। कशानी पर किसी तरह का कर्ज नहीं है। वहीं कशानी के साथ ग्रेजुएट कुछ साथियों पर इतना कर्ज है जो छह अंकों वाली राशि में बैठता है।

'डेली मेल' की रिपोर्ट के मुताबिक ट्यूशन फीस और रहने के स्थान के किराए बढ़ने की वजह से इस तरह की डेटिंग साइट्स की लोकप्रियता छात्रों में बढ़ती जा रही है। कशानी का कहना है कि इस तरह की साइट्स युवा महिलाओं के लिए 'अच्छा संसाधन' है।  वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह के अरेंजमेंट और कुछ नहीं बल्कि 'देह व्यापार' ही है। इसमें ज़रूरतमंद महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है।  

यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा, लॉस वेगास की एसोसिएट प्रोफेसर लिन कोमेला का कहना है कि ट्यूशन फीस देने के लिए स्ट्रिपिंग, प्रोस्टीट्यूशन और वेबकॉम वर्क जैसी चीजें छात्रों के लिए नई नहीं है। लेकिन 'शुगर डैडी' जैसी साइट्स के बारे में हाल में ही सुना गया है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि 'शुगर डैडी' जैसे अरेंजमेंट युगों से चले आ रहे हैं। इंटरनेट ने इस तरह की 'डील्स' को आसान बना दिया है। इसमें तोल-मोल किया जा सकता है।

कशानी का कहना है कि उन्होंने कई लोगों से बात करने के बाद अपने लिए 'शुगर डैडी' चुने। कशानी के मुताबिक उनके लिए 'शुगर डैडी' उनकी परवाह करने वाले अच्छे दोस्त हैं।  

बता दें कि पिछले साल अमेरिका में अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स पर स्कूल खत्म करने पर औसतन 35 हज़ार डॉलर का कर्ज था। ये रकम हर साल बढ़ती जा रही है। वित्तीय मदद विशेषज्ञ मार्क कैंट्रोविट्ज के मुताबिक ग्रेजुएट के लिए औसतन 75 हज़ार डॉलर कर्ज होता  

अनेक छात्रों का कहना है कि उनके कर्ज रहने के खर्च को कवर नहीं करते। अमेरिका के प्रमुख शहरों में रहने के स्थान के लिए किराए इतने बढ़ते जा रहे हैं कि छात्रों के लिए उनसे पार पाना बहुत मुश्किल हो गया है।

न्यूयॉर्क में कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एक ग्रेजुएट स्टूडेंट ने बताया कि उनकी स्कॉलरशिप से ट्यूशन का खर्च तो पूरा हो जाता है लेकिन रहने का खर्च इसमें कवर नहीं होता। इस स्टूडेंट ने पहचान नहीं खोलने की शर्त पर बताया कि उसने क्लासमेट के साथ रूम शेयर किया और न्यूनतम भत्ते पर काम भी किया। साथ ही जो भी फ्रीलांस काम मिला वो किया। इन सबके बावजूद उन्हें सारे खर्च पूरे कर पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्टूडेंट के मुताबिक इस सब का उसकी पढ़ाई और ग्रेड्स पर बुरा असर पड़ा। इस स्टूडेंट के अनुसार विवश होकर उसने शुगर डैडी जैसे अरेंजमेंट वाली डेटिंग वेबसाइट का सहारा लिया।

इस तरह की साइट्स लॉस एंजिलिस और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में खूब फलफूल रही हैं। इन दोनों शहरों में रहने के लिए औसत मासिक किराया 2000 डॉलर से अधिक है।