सबसे कम उम्र में कुलपति बने थे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी


नई दिल्ली (23 जून): भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज पुण्यतिथि है। हालांकि वर्ष 1977 में इसका जनता पार्टी में विलय हो गया था। जनता पार्टी के आतंरिक मतभेदों के बाद 1979 में जनता पार्टी सरकार गिर गई और 1980 में भारतीय जनता पार्टी का एक स्वतंत्र दल के रूप में उदय हुआ।


डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को आशुतोष मुखर्जी के घर में हुआ, जो बंगाल में एक शिक्षाविद और बुद्धिजीवी के रूप में प्रसिद्ध थे। कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक होने के पश्चात श्री मुखर्जी 1923 में सेनेट के सदस्य बने। पिता की मृत्यु के पश्चात, 1924 में उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। 1926 में उन्होंने इंग्लैंड में लिंकन्स इन से 1927 में बैरिस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की। 33 वर्ष की आयु में वह कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए गए और उन्हें विश्व का सबसे युवा कुलपति होने का सम्मान प्राप्त हुआ।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक गुरु गोलवलकर से परामर्श लेकर मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की। 1951-52 के आम चुनावों में राष्ट्रीय जनसंघ के 3 सांसद चुने गए जिनमें एक मुखर्जी भी थे। मुखर्जी भारत की अखंडता और कश्मीर के विलय के दृढ़ समर्थक थे। उन्होंने कहा था कि, “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान, नहीं चलेगा- नही चलेगा”।


मुखर्जी ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के लिए भारतीय जनसंघ ने हिन्दू महासभा और रामराज्य परिषद के साथ सत्याग्रह आरंभ किया। मुखर्जी 11 मई 1953 को 'परमिट सिस्टम' का उल्लंघन करके कश्मीर में प्रवेश किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिए गए। गिरफ्तारी के दौरान ही विषम परिस्थितियों में 23 जून 1953 को उनका स्वर्गवास हो गया।