#Delhi पर सबसे बड़ा 'खतरा', दिल्ली बनी 'Gas Chamber', जानिए आखिर क्यों दिल्ली का दम घुट रहा है...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (7 नवंबर): दिल्ली का दम घुट रहा है, जी हां सही सुना दिल्ली का दम घुट रहा है! दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है! दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में 2.5 करोड़ लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है! लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है! दिल्ली का सबसे बड़ा दुश्मन हमारी ऑक्सीजन को खींच रहा है! दुश्मन जिसे हमने ही पैदा किया है! हमने ही उसको पाल-पोस कर बड़ा किया है! वो दुश्मन है 'SMOG'। जहरीले धुएं (Smoke) और कोहरे (Fog) के खतरनाक मेल से बना Smog। स्मॉग के कारण पूरे दिल्ली एनसीआर में हर तरफ इतना धुआं छाया है कि बाहर निकलने पर सांस लेने में मुश्किल हो रही है, आंखों में जलन महसूस हो रही है। यह स्मॉग कितना जहरीला है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के मुताबिक दिल्ली में रहने वाला हर शख्स 40 सिगरेट के बराबर जहरीला धुआं अपनी सांसों से फेफड़ों में भर रहा है। डराने वाली बात ये है कि अगले तीन दिन तक ऐसे ही हालात बने रहने की आशंका है। इसी डर के कारण पूरी दिल्ली में अगले तीन दिनों के लिए स्कूल बंद कर दिए गए हैं। आज हम आपको पूरे विस्तार से बताएंगे आखिर क्यों दिल्ली का दम घुट रहा है, क्यों दिल्ली बन गई है गैस चैंबर- 

दिवाली के बाद अचानक कैसे दिल्ली की हालात हो गई खराब... - हर साल कि तरह दिवाली के बाद दिल्ली में पटाखों का धुंआ छा गया। - जिसकी वजह से हवा में प्रदूषण का स्तर 10 से 20 गुना तक बढ़ गया। - द्वारका में प्रदूषण 13 गुना, पंजाबी बाग में 15 गुना, वहीं आरके पुरम में 42 गुना था। - सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च यानी SAFAR कि रिपोर्ट से हुआ खुलासा। - दीवाली के अगले दिन पर्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 का स्तर 507 तक पहुंच गया। - जबकि पर्टिकुलेट मैटर, पीएम 10 का स्तर 511 तक पहुंच गया था। - पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर 400 से ज्यादा बेहद खतरनाक माना जाता है। - दीपावली पर प्रदूषण की मात्रा इस बार बीते तीन सालों में सबसे ज्यादा दर्ज की गई थी।

पर्टिकुलेट मैटर स्तर कितना होना चाहिए और अभी कितना है... - दिल्ली में PM 2.5 का स्तर 60 g/m3 होना चाहिए। - लेकिन अभी स्तर 590 g/m3 यानी सामान्य से 10 गुना ज्यादा है। - PM 10 का स्तर दिल्ली में 100 g/m3 होना चाहिए। - लेकिन अभी यह 950 g/m3 यानी सामान्य से 9.5 गुना ज्यादा है।

क्या है पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर... - पार्टिकुलेट मैटर हवा में ठोस या तरल रूप में मौजूद अति सूक्ष्म कण है।  - जिन कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है उन्हें पीएम 2.5। - जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर से कम होता है उन्हें पीएम 10 कहा जाता है।  - इन कणों में हवा में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, कॉर्बन डाई ऑक्साइड। - सल्फर डाई ऑक्साइड, लेड आदि घुले होते हैं, जो हवा को जहरीला बनाते हैं।

अक्सर सर्दियों में पड़ता है Smog... - स्मॉग में गाड़ियों और चिमनियां से निकलने वाले धुएं के अलावा कई तरह के केमिकल होते हैं।  - ये ऑर्गेनिक केमिकल्स ग्राउंड लेवल ओजोन में मिले होते हैं।  - सर्दियों में कोहरे की वजह से ये केमिकल्स जमीन के ठीक उपर जम जाते हैं। - स्मॉग का असर सर्दियों में हवा की कमी कारण कभी भी देखा जा सकता है। - स्मॉग में दूर दूर तक काले धुएं की एक परत सी छाई रहती है।  - विजिबिलिटी 100 मीटर के करीब ही रहती है, जिसमें देखना मुश्किल होता है। 

इस बार सर्दियों की शुरूआत में ही क्यों पड़ गया Smog... - मौसम विभाग के अनुसार दिवाली के बाद अचानक स्मॉग आने का अहम कारण मौसम रहा है। - दिवाली के दो दिन बाद 2 नवंबर को दिल्ली के ऊपर एक एंटी साइक्लोनिक सिस्टम बना। - एंटी साइक्लोनिक सिस्टम के कारण दिल्ली से पटाखों का धुंआ निकलने की जगह वहीं फंस गया। - इसके प्रभाव से पटाखों के प्रदूषण की परत और नीचे को आ गई थी।  - एंटी साइक्लोनिक सिस्टम जब बनता है तो हवा का दबाव ऊपर से नीचे को होने लगता है।  - फिलहाल एंटी साइक्लोनिक सिस्टम का असर अब खत्म होने को है। - हवा की गति भी स्मॉग बने रहने का अहम कारण रहा है। - दिवाली के दिन हवा की एवरेज स्पीड 1.3 मीटर/सेकंड थी। - जबकि पिछले साल यह स्पीड 3.4 मीटर/सेकंड थी। - हवा की धीमी गति के कारण भी दिल्ली पर छाया धुंआ निकल नहीं सका। - मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि 8 नवंबर से स्मॉग छंटनी शुरू हो जाएगी।

दिल्ली में Pollution बढ़ने के क्या कारण हैं... पटाखे- चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन और पुणे यूनिवर्सिटी की स्टडी के मुताबिक, पटाखों से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है। सांप की टिकिया, बम की लड़ी, रंगीन फुलझड़ी, चकरी और अनार PM 2.5 का स्तर 60 g/m3 से 2 हजार गुना ज्यादा 64500 g/m3 पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं।

पराली जलाना- दिल्ली की हवा में फैले जहर के लिए आस-पास के राज्यों में जलाई जा रही पराली को जिम्मेदार माना जा रहा है। पंजाब में हर साल किसान 2.50 करोड़ टन पराली जलाते हैं तो हरियाणा में 90 लाख टन पराली जलती है। पराली गेहूं और धान की फसल का बचा हुआ भूसा होता है। जिसको खतों में छोड़कर जला दिया जाता है और हवा के साथ धुंआ बहते हुए दिल्ली के ऊपर आ जाता है। 1 टन पराली जलाने से 3 किलो कार्बन कण, 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड, 1500 किलो कार्बन डाईऑक्साइड, 200 किलो राख, 2 किलो सल्फर डाईऑक्साइड फैलते हैं।

ईट भट्टे- दिल्ली के आसपास दूसरे राज्यों में चल रहे लगभग चार हजार ईट-भट्टों के कारण भी प्रदूषण बढ़ता है। ये भट्टे ईंटों को पकाने के लिए सरसों की भूसी, प्लास्टिक, टेक्सटाइल वेस्ट, कोयला लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं। इस भट्टों से निकला धुंआ हवा के साथ बहते हुए दिल्ली के ऊपर आ जाता है। धुंए से में कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और मिथेन गैसों की मात्रा बढ़ती है। 

भलस्वा डंपिंग ग्राउंड में आग- भलस्वा डंपिंग ग्राउंड में लगी आग से दिल्ली-एनसीआर में धुंध बढ़ी है। 50 फीट ऊंचे कूड़े के भीमकाय ढेरों में आग लगने से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैस निकलती है जिससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ रहा है। गौरतलब है कि दिल्ली के गाजीपुर डंपिंग ग्राउंड में भी इसी साल सितंबर में आग लगी थी।

दिल्ली एनसीआर में बढ़ता कंस्ट्रक्शन और डिमॉलिशन- कंस्ट्रक्शन के धूल प्रदूषण बढ़ाने का बड़ा कारण है। कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल के रखरखाव का प्रबंधन ठीक नहीं। वो उड़ कर दिल्ली की फिजा में सांस लेना मुश्किल कर रहा है। एनजीटी ने कहा कि हमने खुद देखा है कि साउथ दिल्ली के कई इलाकों मे बिल्डर्स कंस्ट्रक्शन के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

कोयला आधारित बिजली संयंत्र- बदरपुर बिजली संयंत्र को प्रदूषण का एक अहम स्रोत है। 705 मेगावाट क्षमता वाला कोयला आधारित बदरपुर संयंत्र दिल्ली के लिए बिजली उत्पादन करता है। सरकार ने दिल्ली में बड़े के कारण संयंत्र को 10 दिनों के लिए बंद कर दिया है।

वाहनों से प्रदूषण- दिल्ली में लगभग 70 लाख से ज्यादा वाहन हैं। वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने की जरूरत है। दूसरे राज्यों से आने वाले वायु प्रदूषण पर रोकथाम के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। दिल्ली से 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को अभी तक सड़कों से नहीं हटाया गया। इन वजहों से दिल्ली की हवा दिन-प्रतिदिन और भी प्रदूषित होती जा रही है। 

कौन कितना प्रदूषण बड़ा रहा है... IIT Kanpur की रिपोर्ट के अनुसार

   पीएम 10  (प्रतिशत में) पीएम 2.5 (प्रतिशत में)
कंस्ट्रक्शन और डिमॉलिशन  56  38
वाहन                        9 20
इंडस्ट्री  10 11
अन्य कारण 15 19

दिल्ली दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से एक- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में है। देश की राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का स्वरूप 2.5 माइक्रोंस से कम पीएम 2.5 सघनता के तहत आता है। जो सबसे गंभीर माना जाता है। ‘एंबिएंट एयर पॉल्यूशन‘ नाम की इस रिपोर्ट के 2014 के संस्करण में 91 देशों के करीब 1600 शहरों में वायु प्रदूषण है। 

                       दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए आपातकालीन कदम... - दिल्ली सरकार ने हाईलेवल मीटिंग की, जिसमें 1260 km सड़कों की वैक्यूम क्लीनिंग कराने का फैसला हुआ।  - सभी श्मशान घाटों पर स्मोक टैप्पर लगाया जाएगा, जिससे पॉल्यूशन कंट्रोल किया जा सके। - 5 जगहों पर एयर प्यूरीफायर और एक जगह मिस्ट फाउंटेन लगेगा।  - दिल्ली सरकार ने सोमवार से तीन दिन तक सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद करने का आदेश दिया है। - सरकार ने पांच दिनों तक के लिए डीजल वाले जेनरेटर सेट चलाने पर रोक लगा दी है। - बदरपुर पावर प्लांट से राख उठाने पर 10 दिनों तक रोक। 10 दिन के प्लांट भी बंद। - पांच दिनों तक दिल्ली में हर तरह के निर्माण कार्य और तोडफ़ोड़ पर रोक लगा दी गई है। - हेलीकाप्टर से कृत्रिम बारिश कराने पर विचार किया जा रहा है। कूड़ा जलाने पर सख्ती होगी। - सरकार ऑड-इवेन फार्मूला लागू कर सकती है। इस पर गंभीरता से विचार चल रहा है।  - 45 दिन तक पता लगाया जाएगा कि इससे कितना फायदा हुआ।