अस्पताल की बेशर्मी : पोती का शव कंधे पर लेकर भीगता हुआ गया दादा

नई दिल्ली(19 सितंबर): सागर के एक निजी हॉस्पिटल में मानवता उस वक्त शर्मसार हो गई जब पैसों के अभाव में एक गरीब दादा रोते हुए अपनी पोती का शव कंधे पर ही लेकर भीगता हुआ वहां से घर को चल दिया। उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे हॉस्पिटल का बकाया चुका पाते। कुछ लोगों ने मदद की जिसके बाद वे अस्पताल का बिल चुकाकर शव लेकर चल दिए।

- यह अस्पताल भाग्योदय धर्मार्थ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित है बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन को गरीब परिवार की मजबूरी नहीं दिखी। अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि वो इलाज का बकाया चुकाए बिना मासूम का शव नहीं ले जाने दे रहा था। हालांकि प्रबंधन ने इसपर सफाई दी है। 

- बांदरी थाना उमराई गांव से तीन साल की शिवानी के पिता मुकुंद अहिरवार, उसके दादा परमलाल और दादी मुला बाई उसे गांव के कुछ लोगों के कहने पर इलाज के लिए दो दिन पहले इस हॉस्पिटल में लाए थे जहां वो भर्ती की गई थी। मासूम को तेज बुखार था और कुछ अन्य बीमारियों ने भी उसे जकड़ लिया था। इलाज के दौरान रविवार को उसकी मौत हो गई।

- गरीब परिवार कर्ज आदि लेकर जो पैसे लाया था वह पहले ही इलाज में खर्ज हो चुका था। इसके बाद भी अस्पताल का एक हजार रुपया देना बाकी था। मासूम के पिता और दादा का आरोप है कि इलाज के बकाया पैसों को लेकर अस्पताल प्रबंधन उन्हें मासूम का शव तक नहीं दे रहा था तो ऐसे में शव ले जाने के लिए वाहन देना तो दूर की बात थी। 

- ऐसी हालत में बच्ची की दादी मुला बाई ने लोगों के सामने मदद के लिए हाथ फैलाए तो परिसर में मौजूद पप्पू और अजय नाम के व्यक्तियों ने परिवार की मदद की और हजार रुपये चुकाकर बच्ची का शव लिया। इसके बाद परिवार ने बचे हुए कुछ पैसों से ऑटो किया और शव लेकर घर गये। इस दौरान अस्पताल से सड़क तक दादा कंधे पर बच्ची का शव लेकर भीगते हुए गए।   

- वहीं इस मामले में अब अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी सफाई दी है। सहायक प्रबंधक हर्ष श्रीवास्तव ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा है कि हमने इस परिवार का इलाज का बकाया इनकी स्थिति देखकर माफ किया था। उनका यह भी कहना है कि इस परिवार ने शव वाहन की मांग ही नहीं की थी।