हेडली ने खोले कई राज: पुलिस मुख्यालय और सिद्धि विनायक मंदिर था निशाने पर

नई दिल्ली (9 फरवरी): आतंकी डेविड कोलमैन हेडली से गवाही का आज दूसरा दिन है। अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हेडली की गवाही हो रही है। दूसरे दिन की गवाही में भी हेडली ने कई अहम खुलासे किए हैं। आज की गवाही में हेडली ने खुलासा किया है कि 2003 में रिटायर्ड मेजर पाशा से मिला था। उसे मुंबई के ताज होटल की रेकी का काम सौंपा गया था। 

हेडली ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा ने मुंबई पर हमला करने का प्लान 2007 में ही बना लिया था। इसके बाद एक पीओके के मुजफ्फराबाद में हुई एक मीटिंग में पूरा प्लान तैयार किया गया था। इसके बाद ताज होटल की रेकी की जिम्मेदारी हेडली को मिली थी। 2006 में साजिद मीर, अबु काफा, मुजामिल और मेरे बीच एक मीटिंग हुई थी। इसमें ये तय हुआ कि मैं भारत जाऊंगा। इसके आगे हेडली ने बताया कि मेरी गिरफ्तारी मेरी बीवी की वजह से हुई। उसने पैसे की लालच में पुलिस में मेरी शिकायत की। 

> मुंबई में रैकी के लिए GPS का इस्तेमाल किया। > लखवी को मिला था भारत में हमले का जिम्मा > भारतीय सेना में जासूस बनाने को कहा था > एयरफोर्स और नेवल बेस भी थे निशाने पर > पुलिस मुख्यालय और सिद्धि विनायक मंदिर था निशाने पर

 

बता दें कि हेडली ने अपने पहले दिन की गवाही में बताया था कि वह मुंबई हमले से पहले 8 बार भारत आया था। जिसमें 7 बार वो पाकिस्तान से ही भारत में दाखिल हुआ था। वह हाफिज सईद के ऑर्डर्स पर ही लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करता था। हेडली ने गवाही में बताया कि साजिद मीर चाहता था कि मैं भारत में बिजनेस खड़ा करूं। उसी ने मुझे नाम बदलने की सलाह दी थी। 5 फरवरी 2006 को मैंने यूएस के फिलाडेल्फिया में नाम बदलने के लिए अप्लाई किया। मैं नया पासपोर्ट चाहता था ताकि अमेरिकी आइडेंटिटी के साथ भारत जा सकूं।

ट्रेनिंग का कच्चा चिट्ठा

हेडली ने बताया कि 'दौरा-ए-सफा' अध्ययन पाठ्यक्रम है और इसका आयोजन लाहौर के मुरिदके में होता है जबकि दौरा-ए-आम शुरुआती सैन्य प्रशिक्षण है जिसका आयोजन आजाद कश्मीर के मुजफ्फराबाद में होता है। दौुरा-ए-खास के दौरान उसे हथियार चलाने, विस्फोटों व गोला-बारूद के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया। उसने दौरा-ए-रिबात में भी हिस्सा लिया। इसका केंद्र एबदाबाद से 40 मील दूर मनसेरा में था।